जम्मू और कश्मीर

हड़ताल के चलते Jammu में अस्पताल सेवाएं प्रभावित

Ratna Netam
5 April 2026 6:27 PM IST
हड़ताल के चलते Jammu में अस्पताल सेवाएं प्रभावित
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Jammu.जम्मू: जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी है, जिससे मरीजों की देखभाल और अस्पताल सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचे, जिसके कारण कई उपचार और सेवाएं बाधित हुई हैं। हड़ताल में शामिल कर्मचारी अपनी वेतन व भत्तों की मांगों, सुविधाओं में सुधार और काम के माहौल को लेकर प्रशासन से समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि लंबित मुद्दों के कारण मरीजों को समय पर सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। कई परिवारों ने अस्पतालों में लंबी कतारों और उपचार में देरी की शिकायत की।
स्थानीय मीडिया और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हड़ताल के चलते गंभीर मरीजों को तुरंत देखभाल नहीं मिल पा रही, जबकि रोग नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं में भी व्यवधान आया है। कई अस्पतालों ने केवल आपातकालीन सेवाएं चालू रखीं, जिससे गैर-आपात मामलों के इलाज में देरी हुई।
जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि वे कर्मचारी संघ के साथ वार्ता करने के प्रयास कर रहे हैं और जल्द समाधान की कोशिश में हैं। विभाग ने जनता से अपील की है कि वे केवल आपातकालीन मामलों में ही अस्पताल का दौरा करें और सामान्य जांच और उपचार को थोड़े समय के लिए स्थगित करें।
हड़ताल का प्रभाव शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में देखा गया। छोटे कस्बों और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण लोगों को निजी क्लीनिकों और दूरदराज़ अस्पतालों का रुख करना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर स्वास्थ्य क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कई नागरिकों ने कहा कि वे स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों को समझते हैं, लेकिन मरीजों और परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत वार्ता कर समाधान निकालने का आग्रह किया।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि हड़ताल लंबी खिंचने पर राज्य में स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने प्रशासन और कर्मचारी संघ दोनों से स्थिति को गंभीरता से लेने और तत्काल वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का सुझाव दिया।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल का चौथा दिन राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव डाल रहा है। मरीजों की देखभाल बाधित हो रही है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जल्द ही समाधान निकाल कर सेवाओं को सामान्य बनाए।
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