जम्मू और कश्मीर

हाईकोर्ट का सख्त रुख, NDPS मामले में बेल नहीं दी

Ratna Netam
12 April 2026 4:18 PM IST
हाईकोर्ट का सख्त रुख, NDPS मामले में बेल नहीं दी
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Jammu.जम्मू: जम्मू और कश्मीर में NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) अधिनियम से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी को ज़मानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल में हो रही देरी पर गंभीर चिंता और आलोचना भी व्यक्त की। जानकारी के अनुसार, आरोपी की ओर से दायर ज़मानत याचिका में यह दलील दी गई थी कि वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और मामले का ट्रायल धीमी गति से चल रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि ट्रायल में देरी के कारण उसके मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और NDPS कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ज़मानत देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, इसलिए ऐसे मामलों में सावधानीपूर्वक निर्णय लेना आवश्यक है। Jammu and Kashmir हाईकोर्ट ने साथ ही ट्रायल में हो रही देरी पर नाराज़गी जताते हुए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि मामलों की सुनवाई में तेजी लाई जाए ताकि न्याय प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
अदालत ने टिप्पणी की कि न्याय में देरी किसी भी पक्ष के लिए उचित नहीं है, विशेषकर तब जब आरोपी लंबे समय से हिरासत में हो। हालांकि, NDPS मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि NDPS मामलों में ज़मानत देना आमतौर पर कठिन होता है, क्योंकि कानून में सख्त प्रावधान शामिल हैं। अदालतें अक्सर यह सुनिश्चित करती हैं कि आरोपी पर लगे आरोपों की गंभीरता और सबूतों की स्थिति को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जाए। मामले की अगली सुनवाई में ट्रायल की प्रगति पर भी अदालत द्वारा समीक्षा किए जाने की संभावना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गवाहों की पेशी और दस्तावेजी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक ओर आरोपी के अधिकारों और दूसरी ओर समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है। कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह फैसला NDPS मामलों में न्यायिक सख्ती और ट्रायल में तेजी लाने की आवश्यकता दोनों को उजागर करता है, जबकि फिलहाल आरोपी को राहत नहीं दी गई है।
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