जम्मू और कश्मीर

हाईकोर्ट ने तवी बाढ़ DPR शीघ्र समीक्षा के लिए कहा

Ratna Netam
8 May 2026 3:49 PM IST
हाईकोर्ट ने तवी बाढ़ DPR शीघ्र समीक्षा के लिए कहा
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Jammu.जम्मू: जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने तवी नदी बाढ़ शमन परियोजना (DPR) के फास्ट-ट्रैक मूल्यांकन पर जोर दिया है। न्यायालय ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदाओं को रोकने के लिए समयबद्ध और प्रभावी उपाय बेहद आवश्यक हैं और DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की समीक्षा में देरी खतरनाक साबित हो सकती है।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे तवी नदी बाढ़ शमन योजना के सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का शीघ्र मूल्यांकन करें और रिपोर्ट को फास्ट-ट्रैक मोड में अंतिम रूप दें। न्यायालय ने यह भी कहा कि जल संकट और बाढ़ सुरक्षा को लेकर नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों ने हाईकोर्ट को बताया कि तवी नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की संभावना को देखते हुए परियोजना की प्राथमिकताएं तय की गई हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना में डैम निर्माण, बांधों की मजबूती, नालों का उन्नयन और बाढ़ रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीकियों का इस्तेमाल शामिल है।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि DPR की समीक्षा प्रक्रिया में किसी भी विलंब से न केवल वित्तीय नुकसान होगा, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फास्ट-ट्रैक मूल्यांकन में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि तवी नदी पर बाढ़ शमन परियोजनाओं के फास्ट-ट्रैक मूल्यांकन से सरकार को समय पर जरूरी उपाय करने का अवसर मिलेगा। इससे संभावित आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकेगा और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
स्थानीय निवासियों ने कोर्ट के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पिछले सालों में तवी नदी में बार-बार बाढ़ की घटनाओं से भारी नुकसान हुआ है और अगर DPR की समीक्षा और कार्यान्वयन समय पर होता, तो नुकसान कम किया जा सकता था।
अधिकारियों ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि DPR की समीक्षा पूरी तरह तकनीकी विशेषज्ञता और वैज्ञानिक डेटा पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत सभी परियोजना चरणों का समयबद्ध निरीक्षण किया जाएगा, ताकि बाढ़ रोकथाम की योजना पर कोई भी समझौता न हो।
हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग नियमित अपडेट और प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें, ताकि परियोजना की निगरानी में पारदर्शिता बनी रहे।
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