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J&K : जम्मू संभाग में औषधीय पौधों के संरक्षण और विद्यार्थियों में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत National Medicinal Plants Board ने जम्मू संभाग के 100 स्कूलों में हर्बल गार्डन स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना के लिए कुल 53 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है।
यह योजना जम्मू-कश्मीर में पारंपरिक औषधीय ज्ञान को बढ़ावा देने और छात्रों को प्राकृतिक चिकित्सा तथा जड़ी-बूटियों के महत्व से परिचित कराने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मकसद केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों में पर्यावरण संरक्षण और आयुर्वेदिक ज्ञान को लेकर जागरूकता विकसित करना भी है।
यह परियोजना आयुष निदेशालय जम्मू और कश्मीर और जम्मू और कश्मीर औषधीय पादप बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर दी गई है। दोनों पौधों ने क्षेत्र में औषधीय पौधों की क्षमताओं और उनकी सुरक्षा आवश्यकता को देखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे केंद्र ने हरी झंडी दे दी।
योजना के तहत जम्मू संभाग के प्रत्येक जिले में 10-10 स्कूलों का चयन किया गया है, जहां विशेष रूप से हर्बल गार्डन विकसित किए जाएंगे। कुल 100 स्कूलों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन स्कूलों की पहचान जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा की गई है। चयन प्रक्रिया में ऐसे स्कूलों को प्राथमिकता दी गई है जहां पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो और छात्र संख्या भी अधिक हो, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस पहल से लाभान्वित हो सकें।
इन हर्बल गार्डनों में औषधीय गुणों वाले विभिन्न पौधे लगाए जाएंगे, जिनका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता है। इसमें तुलसी, नीम, अश्वगंधा, एलोवेरा जैसी कई महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियां शामिल होने की संभावना है। छात्रों को इन पौधों की पहचान, उपयोग और उनके औषधीय महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
परियोजना के तहत शिक्षकों और छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे इन पौधों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इसके अलावा, स्कूल स्तर पर पर्यावरण शिक्षा को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।
अधिकारियों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में न केवल जैव विविधता के संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि छात्रों को प्रकृति के करीब लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आयुर्वेदिक ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ने की उम्मीद है।
यह परियोजना जम्मू संभाग में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम देने की क्षमता रखती है।





