जम्मू और कश्मीर

HC ने डोडा टेरर-फंडिंग केस में आरोपियों की याचिका खारिज की

Ratna Netam
10 April 2026 6:24 PM IST
HC ने डोडा टेरर-फंडिंग केस में आरोपियों की याचिका खारिज की
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JAMMU.जम्मू: डोडा में जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में टेरर-फंडिंग से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय ने भारत की उग्रवादी गतिविधियों (UAPA) अधिनियम के तहत आरोपित आरोपियों को राहत देने की याचिका को खारिज कर दिया। यह फैसला उस याचिका पर आया जिसमें आरोपी सुरक्षा बंधन और जमानत की मांग कर रहे थे।
जानकारी के अनुसार, आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संगठनों को धन और संसाधन उपलब्ध कराए। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए राहत देने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि UAPA के तहत लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनके मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी तरह की राहत देना उचित नहीं होगा।
इससे पहले आरोपियों ने अदालत में दलील दी थी कि उन्हें लंबे समय से हिरासत में रखा गया है और उन्हें चिकित्सा या परिवारिक कारणों से राहत मिलनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में व्यक्तिगत समस्याओं को प्राथमिकता देना संभव नहीं है और जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए।
इस मामले ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और आतंकवादी फंडिंग पर नियंत्रण की कोशिशों को भी उजागर किया। अधिकारी कहते हैं कि डोडा जैसे जिलों में टेरर-फंडिंग नेटवर्क की पहचान और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। यह मामला इस बात की ओर भी इशारा करता है कि सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कानूनी उपकरणों का पूरा उपयोग करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि UAPA जैसी कानून प्रणाली का उद्देश्य आतंकवाद और उससे जुड़े संगठनों को आर्थिक और संगठनात्मक रूप से कमजोर करना है। इसलिए कोर्ट का यह फैसला इस दिशा में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि इस फैसले के बाद जांच प्रक्रिया और तेज हो जाएगी और आरोपी गतिविधियों की विस्तृत पड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें, ताकि आतंकवाद और उससे जुड़े अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
इस फैसले के बाद मामले के आरोपी वर्तमान में हिरासत में रहेंगे और उनकी कानूनी प्रक्रिया अगले चरणों में आगे बढ़ेगी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में राहत देने से पहले जांच और आरोपों की गंभीरता की पूरी तरह से जांच होना आवश्यक है।
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