जम्मू और कश्मीर

GST से मजबूत होगी जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था, CM उमर का बड़ा बयान

nidhi
9 Oct 2026 7:20 AM IST
GST से मजबूत होगी जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था, CM उमर का बड़ा बयान
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CM उमर अब्दुल्ला ने उठाई मांग
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की 57वीं बैठक में हिस्सा लेते हुए केंद्रशासित प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कर व्यवस्था को अधिक सरल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी जम्मू-कश्मीर की अपनी कर आय का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। ऐसे में जीएसटी परिषद के फैसले क्षेत्र की वित्तीय स्थिति मजबूत करने, आर्थिक विकास को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विभिन्न वस्तुओं और उत्पादों पर लागू कर दरों को अधिक तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता भी जताई।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वित्त मंत्री की जिम्मेदारी निभाते हुए बैठक में भाग लिया। इस दौरान कर संग्रह बढ़ाने, जीएसटी नियमों को सरल बनाने और केंद्र तथा राज्यों के बीच वित्तीय समन्वय मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में सुधार करते समय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्तीय हितों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परिषद के निर्णयों से जम्मू-कश्मीर की राजस्व क्षमता बढ़ेगी और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कर अनुपालन की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। व्यापारियों और कारोबारियों को नियमों का पालन करने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए व्यवस्था में सुधार जरूरी है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न उत्पादों पर लागू जीएसटी दरों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई।
जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए जीएसटी की अहमियत लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में जम्मू-कश्मीर का राज्य जीएसटी संग्रह लगभग 8,586 करोड़ रुपये रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि 11,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में जीएसटी से 13,000 करोड़ रुपये प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर की अपनी कर आय में जीएसटी की भूमिका बढ़ी है। हालांकि, सरकार के सामने राजस्व बढ़ाने के साथ वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की चुनौती भी बनी हुई है।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान के अनुसार जम्मू-कश्मीर की कुल राजस्व प्राप्तियां लगभग 90,018 करोड़ रुपये हैं। इनमें केंद्र सरकार से अनुदान के रूप में करीब 58,218 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। केंद्रशासित प्रदेश की अपनी कुल कर आय लगभग 20,700 करोड़ रुपये अनुमानित है। इसमें जीएसटी का हिस्सा करीब 63 प्रतिशत है।
इससे स्पष्ट होता है कि जम्मू-कश्मीर के लिए जीएसटी केवल कर संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि सरकारी वित्तीय संसाधनों का एक महत्वपूर्ण आधार है। जीएसटी से प्राप्त आय का उपयोग विकास कार्यों और सार्वजनिक सेवाओं के वित्तपोषण में किया जा सकता है। जम्मू-कश्मीर की वित्तीय व्यवस्था अभी भी केंद्रीय सहायता पर काफी निर्भर है। बिजली क्षेत्र का खर्च, राजकोषीय घाटा और विभिन्न विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कर राजस्व में वृद्धि से वित्तीय प्रबंधन को मजबूती मिल सकती है।
बैठक में जीएसटी रजिस्ट्रेशन, रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया। छोटे व्यापारियों को नियमों के पालन में राहत देने और कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया।
जीएसटी परिषद की बैठक में कर संबंधी अपराधों और प्रक्रियात्मक नियमों में बदलाव के महत्वपूर्ण निर्णय भी सामने आए। कर अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों को समाप्त करने और अभियोजन शुरू करने की मौद्रिक सीमा बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने जैसे सुधारों पर सहमति बनी। इन बदलावों का उद्देश्य कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम करना और कर प्रणाली को अधिक सरल बनाना है। जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, होटल, परिवहन, निर्माण और छोटे कारोबार आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। जीएसटी प्रक्रियाएं सरल होने से इन क्षेत्रों के कारोबारियों को प्रशासनिक स्तर पर सुविधा मिल सकती है। हालांकि, इन सुधारों का वास्तविक आर्थिक प्रभाव उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विश्वास जताया कि जीएसटी परिषद के निर्णय जम्मू-कश्मीर की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के साथ विकास और जनकल्याण की गतिविधियों को भी गति देंगे। उन्होंने संतुलित वित्तीय संघवाद और केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। जीएसटी परिषद की बैठक में हुई चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि कर व्यवस्था को सरल बनाने के साथ राजस्व संग्रह बढ़ाना भी सरकारों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। जम्मू-कश्मीर सरकार को उम्मीद है कि इन सुधारों से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में सहायता होगी।
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