जम्मू और कश्मीर

श्रीनगर में मजदूरों की बढ़ी चिंता

Kavita2
3 Aug 2026 3:15 PM IST
श्रीनगर में मजदूरों की बढ़ी चिंता
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श्रीनगर : पुराने शहर के इलाके हवाल में रविवार की सुबह आम दिनों जैसी नहीं थी। जहां रोजाना सुबह प्रवासी मजदूर काम पर जाने की तैयारी में जुटते थे, वहीं इस बार दिन की शुरुआत फोन की लगातार बजती घंटियों से हुई। किराये के छोटे-छोटे कमरों में रहने वाले मजदूर अपने-अपने परिवारों से बात कर रहे थे और उन्हें अपनी सलामती का भरोसा दिला रहे थे।

हवाल क्षेत्र की एक तंग बस्ती में रहने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों के लिए रविवार की सुबह चिंता और बेचैनी से भरी रही। छोटे कमरों में पतले गद्दों पर बैठे कई मजदूर मोबाइल फोन पर दूर-दराज अपने घरों में मौजूद परिवारों से बात करते नजर आए। दूसरी ओर उनके परिवार भी लगातार फोन कर उनकी कुशलक्षेम पूछ रहे थे।

"क्या आप सुरक्षित हैं?", "हम पूरी रात खबरें देखते रहे"— ऐसे सवाल कई मजदूरों ने अपने परिवारों से सुने। हजारों किलोमीटर दूर बैठे परिजन किसी भी अनहोनी की आशंका से परेशान थे और बार-बार फोन कर यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनके अपने लोग सुरक्षित हैं।

प्रवासी मजदूरों ने बताया कि अचानक पैदा हुई चिंताओं के कारण उनके परिवारों की रात बेचैनी में गुजरी। कई लोगों ने कहा कि घर से लगातार फोन आ रहे थे और परिजन उन्हें वापस लौटने की सलाह दे रहे थे। हालांकि मजदूरों ने उन्हें समझाया कि वे सुरक्षित हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

हवाल क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर प्रवासी मजदूर रोजाना की मजदूरी, निर्माण कार्य, छोटे व्यापार और अन्य कामों से जुड़े हुए हैं। इनमें से कई लोग लंबे समय से श्रीनगर में रहकर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं। कश्मीर में काम करने आए इन लोगों के लिए अचानक पैदा हुई स्थिति ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया।

एक मजदूर ने बताया कि परिवार वाले दूर बैठे होने के कारण ज्यादा चिंतित हो जाते हैं। जब भी किसी इलाके में तनाव या किसी अप्रिय घटना की खबर आती है तो सबसे पहले घर से फोन आता है। उन्होंने कहा कि परिवार को केवल यह जानना होता है कि वे सुरक्षित हैं।

कई मजदूरों ने बताया कि उन्होंने सुबह उठते ही सबसे पहले अपने घर फोन किया और परिजनों को भरोसा दिलाया। उनका कहना था कि रोजगार के लिए वे अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर हैं, इसलिए किसी भी खबर का असर उनके परिवारों पर ज्यादा पड़ता है।

पुराने शहर के इस इलाके में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बीच हालांकि डर के साथ-साथ सामान्य स्थिति बनाए रखने की कोशिश भी दिखाई दी। कई लोग रोज की तरह काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरे पर चिंता साफ नजर आ रही थी। मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान वे अपने परिवारों को हालात के बारे में जानकारी दे रहे थे।

स्थानीय लोगों ने भी बताया कि प्रवासी मजदूर इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे लंबे समय से यहां रहकर काम कर रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। किसी भी तरह की असामान्य स्थिति में सबसे पहले उनके परिवारों की चिंता बढ़ जाती है, क्योंकि वे उनसे दूर रहते हैं।

मजदूरों का कहना है कि उनका जीवन काम और परिवार के बीच संतुलन बनाने में गुजरता है। वे रोजी-रोटी के लिए घर से दूर रहते हैं, लेकिन किसी भी संकट की खबर आने पर उनकी पहली चिंता अपने परिवार और उनकी चिंता को शांत करना होती है।

कुछ मजदूरों ने बताया कि वे समाचारों और स्थानीय लोगों से जानकारी लेते रहे, ताकि स्थिति की सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि अफवाहों से बचना और सही सूचना पर भरोसा करना जरूरी है।

प्रशासन की ओर से भी समय-समय पर लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की जाती रही है। स्थानीय स्तर पर भी लोगों को एक-दूसरे का सहयोग करने की सलाह दी गई है।

हवाल की इस प्रवासी बस्ती में रविवार का दिन भले ही फोन कॉल और चिंता के साथ शुरू हुआ, लेकिन मजदूरों ने उम्मीद जताई कि हालात सामान्य रहेंगे। उनके लिए सबसे बड़ी राहत यही थी कि वे अपने परिवारों से बात कर सके और उन्हें अपनी सुरक्षा का भरोसा दिला सके।

सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे परिवारों के लिए भी इन फोन कॉल्स ने चिंता के बीच राहत का काम किया। एक बार फिर यह साफ हुआ कि घर से दूर रहने वाले मजदूरों के लिए परिवार से जुड़ा भरोसा और संवाद सबसे बड़ा सहारा होता है।

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