जम्मू और कश्मीर

Gaurav ने राहुल गांधी के बयान को बताया देशहित के विपरीत

Ratna Netam
3 May 2026 5:00 PM IST
Gaurav ने राहुल गांधी के बयान को बताया देशहित के विपरीत
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Jammu.जम्मू: भारतीय राजनीति में एक बार फिर से राहुल गांधी के बयान ने विवाद को जन्म दिया है। हाल ही में राहुल गांधी द्वारा दिए गए कुछ बयानों को लेकर भाजपा नेता गौरव ने उन पर तीखा तंज कसा और कहा कि इस तरह के बयान देश के रणनीतिक हितों के खिलाफ हैं।
गौरव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “राहुल गांधी के हालिया बयान ने हमारे राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की सुरक्षा और रणनीतिक निर्णयों में किसी भी तरह का विरोध अस्वीकार्य है। इस समय हमें एकजुट होकर देश के हितों की रक्षा करनी चाहिए, न कि सवाल उठाने चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक विरोध और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति की आती है, तो ऐसे मुद्दों पर बिना सोच-विचार के बयान देना खतरनाक हो सकता है। गौरव ने कहा कि राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेताओं को अपनी जिम्मेदारी का एहसास करना चाहिए और देशहित को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद से राजनीतिक तापमान बढ़ सकता है, क्योंकि राहुल गांधी अक्सर संवेदनशील मुद्दों पर बहस को हवा देते रहे हैं। गौरव ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा, “राष्ट्रीय हितों को लेकर हल्के तरीके से बयान देना देश के लिए खतरे का संकेत है। हमें चाहिए कि सभी राजनीतिक दल ऐसे मामलों में संयम दिखाएँ।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान और उनका विरोध अक्सर चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं। गौरव के तंज के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद दोनों पक्षों के लिए अवसर और चुनौती दोनों ला सकता है।
इस मौके पर गौरव ने मीडिया से अपील की कि वह जनता तक सही संदेश पहुँचाएँ। उन्होंने कहा, “हमें देशहित के मुद्दों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। अगर कोई भी नेता या पार्टी देश की सुरक्षा और रणनीतिक निर्णयों पर सवाल उठाती है, तो उसका जवाब देने का हमारा दायित्व बनता है।”
स्थानीय नागरिकों ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने गौरव के बयान का समर्थन किया और कहा कि राष्ट्रीय हितों को लेकर राजनीतिक बहस सीमित और जिम्मेदार होनी चाहिए। वहीं कुछ ने राहुल गांधी के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश की, लेकिन आम राय यही रही कि सुरक्षा और रणनीति जैसे संवेदनशील विषयों पर नेताओं को सतर्क रहना चाहिए।
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