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जम्मू और कश्मीर
मछली पालन ने बदली बसंत कुमार की जिंदगी, सरकारी योजना बनी सहारा
nidhi
22 Oct 2026 8:47 AM IST

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मछली पालन से बढ़ाई कमाई
मीरा साहिब: जम्मू के सतवारी ब्लॉक के खवास्का गांव के किसान बसंत कुमार खेती के साथ मछली पालन कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने सरकारी योजना की मदद से अपनी जमीन पर तालाब बनवाकर इस व्यवसाय की शुरुआत की। अब मछली पालन उनके लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन गया है। इस काम से उन्होंने क्षेत्र में अपनी अलग पहचान भी बनाई है। बसंत दूसरे युवाओं को भी मछली पालन से जुड़ने और इसे रोजगार के अवसर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
बसंत कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022-23 में मछली पालन का काम शुरू किया था। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत फिशरी पॉन्ड का निर्माण करवाया। खेती से जुड़े होने के कारण उन्होंने अपनी जमीन का इस्तेमाल एक अन्य आय स्रोत विकसित करने में किया। उन्होंने तीन कनाल जमीन में तालाब बनवाया है, जहां वह मछली पालन कर रहे हैं।
किसान के मुताबिक, इस व्यवसाय की शुरुआत में उन्हें सरकारी योजना का सहारा मिला। तालाब निर्माण के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उनके लिए काम शुरू करना आसान बनाया। बसंत ने बताया कि मछली पालन विभाग की ओर से तालाब निर्माण के लिए 1.85 लाख रुपये की राशि दो किस्तों में उपलब्ध करवाई जाती है। उन्होंने इसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलने की भी जानकारी दी। हालांकि, सहायता राशि और सब्सिडी की गणना का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान संबंधित विभाग से पात्रता और आर्थिक सहायता की शर्तों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
बसंत कुमार का अनुभव खेती के साथ आय के अन्य साधन अपनाने की एक मिसाल है। उन्होंने अपनी कृषि गतिविधियों के साथ मछली पालन को जोड़ा है। इससे वह जमीन का उपयोग करते हुए अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। उनके लिए यह व्यवसाय खेती के साथ आगे बढ़ने का अवसर बना है। अब वह अपने अनुभव के जरिए युवाओं का ध्यान भी इस काम की ओर खींच रहे हैं। मछली पालन शुरू करने के लिए तालाब का निर्माण एक अहम शुरुआती कदम होता है। बसंत ने इसके लिए अपनी तीन कनाल जमीन का चयन किया। सरकारी योजना के तहत तालाब तैयार करवाने के बाद उन्होंने इस काम को अपने व्यवसाय का हिस्सा बनाया। उनकी पहल बताती है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और योजनाओं की जानकारी का उपयोग कर रोजगार के विकल्प तलाशे जा सकते हैं।
हालांकि, मछली पालन से होने वाली कमाई हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। इसमें तालाब की स्थिति, पानी की उपलब्धता, देखभाल, उत्पादन और बिक्री जैसी बातों की भूमिका रहती है। इसलिए इस व्यवसाय में उतरने वाले युवाओं के लिए शुरुआत से पहले इसकी जरूरतों और खर्च को समझना उपयोगी है। संबंधित विभाग से तकनीकी जानकारी लेकर काम की योजना बनाई जा सकती है। बसंत की कमाई का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन उनके अनुसार खेती के साथ यह काम अच्छी आमदनी दे रहा है। बसंत अब चाहते हैं कि दूसरे युवा भी मछली पालन को रोजगार के एक विकल्प के रूप में देखें। वह उन्हें इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। खवास्का गांव के इस किसान की पहल उन लोगों के लिए एक उदाहरण है, जो खेती के साथ अतिरिक्त आय का साधन विकसित करना चाहते हैं। सरकारी सहायता से शुरू किया गया उनका प्रयास अब कमाई के साथ दूसरों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने का माध्यम भी बन रहा है।
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