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Jammu-कश्मीर में पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 में

Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर एक बार फिर वैश्विक फिल्म जगत के नक्शे पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में पहली बार अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफजेके)-2026 के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
यह अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 7 से 11 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह आयोजन केवल फिल्म जगत से जुड़ा एक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बैठक के दौरान कहा कि इस फिल्म महोत्सव का उद्देश्य प्रदेश को वैश्विक फिल्म निर्माण और रचनात्मक उद्योगों के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहर लंबे समय से फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करती रही है, और यह महोत्सव इस पहचान को और मजबूत करेगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आयोजन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि दुनिया भर से प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता, निर्देशक, कलाकार और सिनेमा प्रेमी इसमें शामिल हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महोत्सव में तकनीकी गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और अतिथि सत्कार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फिल्म महोत्सव के जरिए जम्मू-कश्मीर को एक नए सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसमें फिल्म स्क्रीनिंग, अंतरराष्ट्रीय फिल्म प्रतियोगिताएं, कार्यशालाएं, पैनल चर्चाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके साथ ही युवा फिल्म निर्माताओं और स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति देगा। उन्होंने बताया कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म निर्माता और कलाकार किसी क्षेत्र में शूटिंग या कार्यक्रमों के लिए आते हैं, तो इससे वहां पर्यटन, होटल उद्योग, परिवहन और स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ मिलता है। जम्मू-कश्मीर जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस महोत्सव से निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। फिल्म निर्माण, मीडिया प्रोडक्शन और डिजिटल कंटेंट से जुड़े क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय युवाओं को फायदा मिलेगा।
प्रशासन का मानना है कि यह आयोजन जम्मू-कश्मीर की छवि को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगा। लंबे समय से क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को यह महोत्सव एक नई पहचान देगा। इसके जरिए प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
महोत्सव के दौरान देश-विदेश के कई प्रसिद्ध फिल्मकारों और कलाकारों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए विभिन्न देशों के फिल्म बोर्ड और सांस्कृतिक संस्थानों से संपर्क किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि यह आयोजन एक वैश्विक स्तर का सांस्कृतिक उत्सव बने।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि महोत्सव के दौरान स्थानीय संस्कृति, लोक कला और पारंपरिक संगीत को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इससे जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आयोजन सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर भारत के प्रमुख फिल्म शूटिंग और प्रोडक्शन हब के रूप में उभर सकता है। इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि महोत्सव के लिए विशेष नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा, ताकि भविष्य में भी इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन नियमित रूप से किए जा सकें।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव-2026 को राज्य के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन न केवल फिल्म जगत को एक नया मंच देगा, बल्कि पर्यटन, रोजगार और निवेश के क्षेत्र में भी व्यापक प्रभाव डालने की क्षमता रखता है।





