जम्मू और कश्मीर

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग रेप केस में पुलिस को फटकार, SHO को चेतावनी

Payal
3 April 2026 4:36 PM IST
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग रेप केस में पुलिस को फटकार, SHO को चेतावनी
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Jammu.जम्मू: जम्मू के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग से रेप के एक गंभीर मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने विशेष रूप से कैंप थाने के SHO को चेतावनी दी कि अगर जांच में लापरवाही या देरी बरती गई तो उन्हें यात्राओं का सामना करना पड़ेगा। यह मामला नाबालिग पीड़ितों के खिलाफ हुए यौन उत्पीड़न और उससे जुड़े कानूनी सवालों में पुलिस की लापरवाही को लेकर सामने आया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज ने साफ किया कि नाबालिग पीड़ितों के मामलों में पुलिस को तत्काल और पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। जज ने कहा कि पुलिस की लापरवाही या अनदेखी पीड़ितों के अधिकारों का हनन करती है और समाज में अपराधियों को हौसला देती है। कोर्ट ने SHO को चेतावनी देते हुए कहा, “यदि मामले की जांच में देरी या कमी पाई जाती है, तो SHO को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।”
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जांच अधिकारी को मामले में सभी संभावित गवाही और गवाहों का समय पर संकलन सुनिश्चित करना होगा। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पीड़ितों के मानसिक और शारीरिक सुरक्षा का ध्यान रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने जांच में लापरवाही करने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की संभावना बढ़ाई।
इस मामले में कोर्ट ने फास्ट ट्रैक प्रक्रिया का पालन करने के महत्व को भी रेखांकित किया। जज ने कहा कि नाबालिग पीड़ितों के मामलों में तेजी से सुनवाई और निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि न्याय समय पर पहुंच सके और पीड़ित को न्याय की भावना मिले। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या धीमी कार्रवाई अपराधियों को बढ़ावा देती है और न्याय प्रणाली की जिम्मेदारी को कमजोर करती है।
एसएचओ और संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे मामले की जांच में हर कदम का रिकॉर्ड तैयार करें और कोर्ट को नियमित रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया कि पीड़ितों को किसी भी प्रकार का मानसिक दबाव या भय न हो और उनका विश्वास न्याय प्रणाली पर बना रहे।
वहीं, पीड़ितों के परिवार ने कोर्ट की कड़ी चेतावनी का स्वागत किया और कहा कि पुलिस कार्रवाई में तेजी से आने से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट के पूछताछ से अधिकारियों में जिम्मेदारी और जिम्मेदारियां।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन गंभीर खर्चों का कारण बन सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नाबालिगों के अधिकार और सुरक्षा सर्वोपरि हैं और पुलिस को इसे सुनिश्चित करना होगा।
इस कड़ी चेतावनी के बाद पुलिस अधिकारियों में सावधानी बढ़ने की संभावना है और यह मामला जम्मू-कश्मीर में नाबालिगों के खिलाफ अपराध की जांच और न्याय प्रक्रिया में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
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