जम्मू और कश्मीर

दिल्ली में प्रतिबंधों को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने उठाए सवाल

Kiran
11 Oct 2026 11:50 AM IST
दिल्ली में प्रतिबंधों को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने उठाए सवाल
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Srinagar श्रीनगर, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से निपटने का केंद्र सरकार का तरीका कश्मीर के लोगों के साथ बरसों से हो रहे बर्ताव की याद दिलाता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विपक्ष की आवाज़ को "दबाना" और लोगों को जायज़ चिंताएं उठाने के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र की भावना को "कमज़ोर" करता है। यहां जारी एक बयान में अब्दुल्ला ने कहा कि अच्छे शासन और असरदार प्रशासन के लिए एक मज़बूत, सक्रिय और सशक्त विपक्ष की ज़रूरत होती है, जो जनता की शिकायतों को सामने ला सके और सरकार को जवाबदेह ठहरा सके।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सिर्फ़ आलोचना करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनता की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करना, सरकारी नीतियों की समीक्षा करना और संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना भी शामिल है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की आवाज़ को "दबाना", असहमति को बर्दाश्त न करना और लोगों को जायज़ चिंताएं उठाने के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र की भावना को "कमज़ोर" करता है और अच्छे शासन के दावों को "बेमानी" बना देता है।
उन्होंने कहा, "एक मज़बूत लोकतांत्रिक व्यवस्था अभिव्यक्ति की आज़ादी, अलग-अलग विचारों के सम्मान, जनभागीदारी और संस्थागत जवाबदेही पर टिकी होती है। इन बुनियादी सिद्धांतों से कोई भी विचलन लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है।" मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को सरकार ने अभूतपूर्व सुरक्षा घेराबंदी और 7,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों (जिनमें CJP नेता अभिजीत दिपके, चार पूर्व मुख्यमंत्री और यूट्यूबर ध्रुव राठी शामिल थे) को हिरासत में लेकर नाकाम कर दिया।
NC प्रमुख ने "असहमति की आवाज़ों को दबाने और डर का माहौल बनाने के लिए डराने-धमकाने, दबाव डालने और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग" पर चिंता जताते हुए कहा कि राजधानी में लोगों की आवाज़ को "दबाने" के लिए अपनाया जा रहा तरीका कश्मीर के लोगों के साथ बरसों से हो रहे बर्ताव की याद दिलाता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "जनता की आवाज़ को दबाने, असहमति पर रोक लगाने और जायज़ मांगों को नज़रअंदाज़ करने से समस्याएं हल नहीं होतीं, बल्कि जनता और सत्ता में बैठे लोगों के बीच की खाई और चौड़ी हो जाती है। लोकतंत्र की ताकत इस बात को सुनिश्चित करने में है कि हर नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने और शांतिपूर्ण व संवैधानिक तरीकों से अपने अधिकारों के लिए प्रयास करने की आज़ादी हो।" अब्दुल्ला ने कहा कि वोट लोगों द्वारा सौंपी गई एक बहुमूल्य अमानत है और लोकतंत्र की नींव है।
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