ओडिशा

प्रसव पीड़ा में महिला को स्ट्रेचर पर 3 किमी पैदल ले गए परिजन

Kavita2
14 Aug 2026 12:28 PM IST
प्रसव पीड़ा में महिला को स्ट्रेचर पर 3 किमी पैदल ले गए परिजन
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कोरापुट: विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को लेकर किए जा रहे दावों के बीच ओडिशा के कोरापुट जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण इलाकों में अब भी मौजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर कर दिया है। नंदपुर ब्लॉक के एक गांव में प्रसव पीड़ा से जूझ रही 27 वर्षीय महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्वजन और 108 एंबुलेंस कर्मियों को करीब तीन किलोमीटर तक स्ट्रेचर लेकर पैदल चलना पड़ा।

मामला नंदपुर ब्लॉक के अतंडा पंचायत अंतर्गत श्रीगामपुट गांव का है। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में एंबुलेंस चालक, स्वास्थ्य कर्मियों और परिवार के लोगों को महिला को स्ट्रेचर पर लेकर पैदल मुख्य सड़क तक आना पड़ा, जहां एंबुलेंस खड़ी थी।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 5:30 बजे श्रीगामपुट गांव की रहने वाली मणि खिल को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार के लोगों ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को इसकी सूचना दी, ताकि महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।

सूचना मिलने के बाद 108 एंबुलेंस चालक गोपाल कृष्ण नायक, फार्मासिस्ट राहुल पांगी और सहायक दीपक पात्रा महिला को लेने के लिए गांव की ओर रवाना हुए। हालांकि, खराब सड़क और दुर्गम रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई।

एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि रास्ते की स्थिति इतनी खराब थी कि वाहन को गांव से करीब तीन किलोमीटर पहले ही रोकना पड़ा। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों की मदद से स्ट्रेचर उठाया और महिला को पैदल एंबुलेंस तक पहुंचाया।

करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद मणि खिल को एंबुलेंस में बैठाया गया और फिर उसे अस्पताल ले जाया गया। समय पर अस्पताल पहुंचने के बाद महिला को इलाज उपलब्ध कराया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि श्रीगामपुट गांव में सड़क सुविधा का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव तक सड़क निर्माण का काम जल्द पूरा किया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण इनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। खासकर आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी होता है। ऐसे में दुर्गम इलाकों में बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।

कोरापुट जैसे आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। प्रशासन की ओर से समय-समय पर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर कई जगह अब भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सड़क कनेक्टिविटी के मुद्दे को सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जल्द कदम उठाएगा।

फिलहाल मणि खिल को अस्पताल पहुंचा दिया गया है और स्वास्थ्य कर्मियों की तत्परता से समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकी। लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि आजादी के दशकों बाद भी कई गांवों तक बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पाई हैं।

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