जम्मू और कश्मीर

FRA के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर

Ratna Netam
21 April 2026 5:45 PM IST
FRA के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर
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Jammu.जम्मू: उपमुख्यमंत्री राणा ने आज जम्मू-कश्मीर प्रशासन को वन अधिकार कानून (FRA) के पालन को तेज़ और सरल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जमीनी स्तर पर नागरिकों को उनके वन भूमि और अधिकारों का लाभ आसानी से मिले।
राणा ने अधिकारियों से स्पष्ट निर्देश दिए कि FRA के तहत वन भूमि पर अधिकार देने की प्रक्रिया में जटिलताओं को कम किया जाए और आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल नागरिकों को न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाए, ताकि वे FRA के तहत आवेदन की सटीक और समयबद्ध जांच सुनिश्चित कर सकें। राणा ने यह भी जोर दिया कि डिजिटल रिकॉर्डिंग और मॉनिटरिंग प्रणाली का उपयोग बढ़ाकर प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाया जाए।
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता को उनके अधिकारों और FRA के तहत मिलने वाले लाभों की जानकारी विभिन्न माध्यमों—जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म, वर्कशॉप और स्थानीय पंचायत बैठक—के माध्यम से दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी।
राणा ने यह भी कहा कि FRA के अनुपालन में स्थानीय प्रशासन और वन विभाग का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि वे सभी आवेदनों की समीक्षा, आवश्यक सत्यापन और निर्णय लेने में जवाबदेही बनाए रखें।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री का यह कदम जम्मू-कश्मीर में वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे वन भूमि पर अधिकार रखने वाले नागरिकों को उनके हक़ तक पहुँच सुनिश्चित होगी।
राणा ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए कि FRA के तहत अनुपालन और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल सिर्फ नियम लागू करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि जनता की भागीदारी और उनके अधिकारों की रक्षा को भी सुनिश्चित करेगी।
कुल मिलाकर, राणा के निर्देश से FRA के क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता आएगी, जिससे जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण समुदायों को उनके वन अधिकारों का उचित लाभ मिलेगा। यह पहल नागरिकों के अधिकारों को मजबूत करने और प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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