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जम्मू और कश्मीर
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भूचाल, रुहुल्लाह मेहदी ने किया इस्तीफे का ऐलान
Ratna Netam
31 Oct 2026 2:13 PM IST

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्रीनगर लोकसभा सीट से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) से अलग होने और लोकसभा की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह 3 नवंबर 2026 को पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। अपने फैसले के पीछे उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। उनके इस ऐलान से जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।रुहुल्लाह मेहदी के कार्यालय की ओर से 30 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में जानकारी साझा की गई। बयान में कहा गया कि सांसद 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और अपनी लोकसभा सीट दोनों से इस्तीफा देंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनता से अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और लोगों के अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों को पूरा करने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।यह इस्तीफा अभी घोषित निर्णय है, जिसे 3 नवंबर को औपचारिक रूप दिया जाना है।
पार्टी नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप
रुहुल्लाह मेहदी ने अपने बयान में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेता जम्मू-कश्मीर को एक ऐसी जागीर की तरह देखते हैं, जिसे परिवार के भीतर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलाया जाता है। उनके मुताबिक, नेताओं को लगता है कि जनता चुनाव में वोट देने के बाद अपनी बात रखने का अधिकार खो देती है।उन्होंने कहा कि जब पार्टी से उसके चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की मांग की जाती है, तो जनता को राजनीतिक वास्तविकताओं और मजबूरियों का हवाला दिया जाता है। रुहुल्लाह ने इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता यह अच्छी तरह समझती है कि कौन सा वादा तोड़ा गया है और किसे राजनीतिक मजबूरी बताकर टाला जा रहा है।उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया कि पार्टी ने जिन मुद्दों को लेकर जनता से समर्थन मांगा था, सत्ता हासिल करने के बाद उन्हीं मुद्दों को पीछे छोड़ दिया गया। रुहुल्लाह ने इसे जनता के भरोसे के साथ धोखा बताया है।
अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर बढ़ा मतभेद
रुहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच सबसे बड़ा मतभेद अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे पर सामने आया है। जम्मू-कश्मीर से अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यह मुद्दा केंद्र शासित प्रदेश की राजनीति में लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।रुहुल्लाह का आरोप है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए संघर्ष करने का वादा किया था। इसके अलावा राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का भरोसा भी दिया गया था। लेकिन अब पार्टी इन मुद्दों पर पहले जैसी प्रतिबद्धता नहीं दिखा रही है।उन्होंने पार्टी नेतृत्व के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता ने इन वादों पर भरोसा करके पार्टी को समर्थन दिया था। ऐसे में इन मुद्दों को छोड़कर केवल सत्ता की राजनीति करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।रुहुल्लाह ने राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर पार्टी की रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं। अगस्त में उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को एक पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने पत्र में कहा था कि केवल राज्य का दर्जा बहाल करने को राजनीतिक लक्ष्य की अंतिम सीमा मान लेना उचित नहीं है। उनके अनुसार, इससे अगस्त 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों को सामान्य राजनीतिक स्थिति के रूप में स्वीकार करने का संकेत जा सकता है।
3 नवंबर को बडगाम में जनता को करेंगे संबोधित
रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को इस्तीफा देने के लिए खास तारीख चुनी है। इसी दिन उनके पिता और राजनेता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि है। उनके पिता की एक आतंकी हमले में मौत हुई थी। इस अवसर पर बडगाम के बेहिश्त-ए-जहरा पार्क में एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।सांसद के कार्यालय की ओर से लोगों को इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया गया है। माना जा रहा है कि रुहुल्लाह इस कार्यक्रम के दौरान जनता को संबोधित करेंगे और अपने राजनीतिक फैसले के बारे में विस्तार से बात रखेंगे।उन्होंने संकेत दिया है कि श्रीनगर लोकसभा सीट से उनका चुनाव जीतना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक उपलब्धि नहीं था, बल्कि जनता के साथ किए गए वादों से जुड़ा हुआ था। इसलिए वह ऐसी स्थिति में सांसद बने रहना नहीं चाहते, जहां उनके मुताबिक जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया जा रहा है।
पहले भी पार्टी नेतृत्व से जता चुके हैं नाराजगी
रुहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व के बीच मतभेद अचानक सामने नहीं आए हैं। पिछले एक साल से दोनों के बीच कई मुद्दों पर असहमति की खबरें सामने आती रही हैं। जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति के युक्तिकरण का मुद्दा भी इस टकराव की प्रमुख वजहों में शामिल रहा है।रुहुल्लाह ने इस साल अगस्त में फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में इस्तीफे का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी नेतृत्व को पहले जनता के प्रति जवाबदेही तय करनी चाहिए। उनका कहना था कि राजनीतिक सिद्धांतों और चुनावी प्रतिबद्धताओं को सत्ता की सुविधा के अनुसार नहीं बदला जाना चाहिए।अब उनके ताजा ऐलान ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए बढ़ सकती हैं राजनीतिक चुनौतियां
रुहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है। खासकर इसलिए क्योंकि वह श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं।उनके इस फैसले से पार्टी के भीतर असंतोष और नेतृत्व की रणनीति को लेकर बहस तेज हो सकती है। हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ विधायकों में नाराजगी की खबरें सामने आई थीं। ऐसे समय में एक सांसद का पार्टी और लोकसभा दोनों से इस्तीफा देने का ऐलान पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकता है।हालांकि, रुहुल्लाह मेहदी आगे किस राजनीतिक रास्ते पर चलेंगे, नई पार्टी बनाएंगे या किसी अन्य राजनीतिक संगठन से जुड़ेंगे, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल उनका घोषित फैसला 3 नवंबर को पार्टी और संसद से अलग होने का है।अब सभी की नजर 3 नवंबर को बडगाम में होने वाले उनके कार्यक्रम पर रहेगी। इस दिन उनके अगले राजनीतिक कदम और इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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