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JAMMU.जम्मू: जम्मू में डोगरी साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पुस्तक मुस्कान ते चिंदू का भव्य विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम शहर में आयोजित एक साहित्यिक समारोह के दौरान संपन्न हुआ, जिसमें कई वरिष्ठ साहित्यकारों, शिक्षाविदों और भाषा प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक और अन्य अतिथियों ने डोगरी भाषा के संरक्षण और संवर्धन पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं और इन्हें बचाने के लिए ऐसे साहित्यिक प्रयास बेहद आवश्यक हैं।
इस अवसर पर साहित्य प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिला। पुस्तक ‘मुस्कान ते चिंदू’ को डोगरी भाषा में एक महत्वपूर्ण रचना बताया गया, जो न केवल भाषा की समृद्धि को दर्शाती है, बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं को भी सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज के समय में जब युवा पीढ़ी अंग्रेजी और हिंदी की ओर अधिक आकर्षित हो रही है, ऐसे में डोगरी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में साहित्यिक रचनाएं लिखना और उनका प्रकाशन करना एक सराहनीय कदम है। इससे भाषा के प्रति लोगों की रुचि बढ़ती है और सांस्कृतिक धरोहर भी सुरक्षित रहती है।
जम्मू के Jammu में आयोजित इस कार्यक्रम को साहित्यिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लेखकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन न केवल लेखकों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने में भी मदद करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि डोगरी भाषा में और अधिक पुस्तकें, कविताएं और कहानियां प्रकाशित की जानी चाहिए ताकि यह भाषा और अधिक समृद्ध हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की आवश्यकता है।
पुस्तक विमोचन के दौरान उपस्थित लोगों ने लेखक को शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह रचना डोगरी साहित्य के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करेगी। कई प्रतिभागियों ने पुस्तक की विषय-वस्तु की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज और संस्कृति के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया और भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही। कुल मिलाकर, ‘मुस्कान ते चिंदू’ का विमोचन डोगरी साहित्य के लिए एक प्रेरणादायक और यादगार क्षण साबित हुआ।
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