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जम्मू और कश्मीर
उमर सरकार में असंतोष 25 विधायकों की मंत्रियों को बदलने की मांग का दावा
nidhi
1 Nov 2026 9:29 AM IST

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नाराजगी विधायकों ने मांगा सरकार में बदलाव
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर नाराजगी सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 25 विधायकों ने मुख्यमंत्री के अलावा सभी आठ मंत्रियों को बदलने और उनके राजनीतिक सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग की है। रिपोर्ट में इसके लिए 15 दिन की समयसीमा दिए जाने का दावा भी किया गया है। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने घटनाक्रम को बगावत मानने से इनकार किया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर की शाम विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर बैठक हुई। इसमें शामिल एक विधायक के हवाले से बताया गया कि 18 विधायक मौके पर मौजूद थे और सात अन्य ऑनलाइन जुड़े। बैठक में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन तथा विभागों का बंटवारा करने से पहले पार्टी के भीतर व्यापक विचार-विमर्श की मांग उठी। विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग खबरों में अंतर है, इसलिए 25 का आंकड़ा संबंधित रिपोर्ट के दावे के रूप में सामने आया है।
ग्रेटर कश्मीर की रिपोर्ट में 18 विधायकों के सामूहिक नाम से 30 अक्टूबर का ज्ञापन दिए जाने का उल्लेख है। इसमें मंत्रिमंडल में बदलाव के साथ शासन में जवाबदेही, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार को हटाने और राज्य का दर्जा बहाल कराने के लिए नए सिरे से राजनीतिक अभियान चलाने जैसी मांगें बताई गई हैं। इससे संकेत मिलता है कि असंतोष केवल मंत्री पदों तक सीमित नहीं है; सरकार और संगठन के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, मनीकंट्रोल की खबर के अनुसार, बैठक में शासन में अधिक जवाबदेही और हालिया मंत्रिमंडल फेरबदल के लिए अपनाए गए मानदंडों में पारदर्शिता की मांग की गई। इस रिपोर्ट में जम्मू और कश्मीर घाटी, दोनों क्षेत्रों के विधायकों के समूह में शामिल होने की बात कही गई है। कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद की इच्छा भी जताई। हालांकि, इन मांगों के बाद किसी सामूहिक इस्तीफे या सरकार से समर्थन वापस लेने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। पार्टी के कश्मीर प्रांतीय अध्यक्ष शौकत अहमद मीर ने मतभेद और बगावत की खबरों को खारिज किया है। पार्टी का पक्ष है कि विधायकों की बैठक को विद्रोह के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। मीर के अनुसार, कुछ वरिष्ठ विधायक पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मिलने का समय चाहते थे। उन्होंने मंत्री पदों की सीमित संख्या का भी उल्लेख किया।
यह घटनाक्रम 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के कुछ दिन बाद सामने आया है। उस विस्तार में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को शामिल किया गया था। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिपरिषद में स्थान नहीं मिलने पर चिंता जताई गई थी। फिलहाल मंत्रियों को हटाने की मांग को सरकार का निर्णय नहीं माना जा सकता। नेतृत्व इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और विधायकों के साथ बातचीत किस स्तर पर होती है, इससे आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। अभी सामने आया घटनाक्रम पार्टी के भीतर असंतोष और बदलाव की मांग से जुड़ा है, जबकि संगठन बगावत के दावों को खारिज कर रहा है।
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