जम्मू और कश्मीर

स्टेटहुड की आड़ में अनुच्छेद 370 की चर्चा मंजूर नहीं, सुनील शर्मा ने उमर सरकार को घेरा

Kavita2
25 Sept 2026 5:29 PM IST
स्टेटहुड की आड़ में अनुच्छेद 370 की चर्चा मंजूर नहीं, सुनील शर्मा ने उमर सरकार को घेरा
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड यानी राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे को लेकर शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया। नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। शर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की आड़ में ग्रेटर ऑटोनॉमी और विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दों को फिर से बहस के केंद्र में लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध करेगी।

सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने के विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। पार्टी विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक विधायक स्टेटहुड के मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ अनुच्छेद 370 या ऑटोनॉमी जैसे मुद्दों को जोड़ने का पार्टी विरोध करेगी।

भाजपा नेता ने कहा कि स्टेटहुड और विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दों को एक साथ नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस पर आरोप लगाया कि वे राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के साथ ऐसे मुद्दों को भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर भाजपा का रुख अलग है। शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी स्टेटहुड पर बहस करेगी, लेकिन अनुच्छेद 370 और ऑटोनॉमी से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा का विरोध करेगी।

जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचा अगस्त 2019 में बदला था। संसद द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम पारित किए जाने के बाद पूर्ववर्ती राज्य को पुनर्गठित कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।

इसके बाद से राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार भी स्टेटहुड की बहाली को प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल करती रही है। फरवरी 2026 में विधानसभा में बजट पेश करते समय भी उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार के सामने मौजूद परिस्थितियों और प्रशासनिक चुनौतियों का उल्लेख किया था।

वहीं, अनुच्छेद 370 और विशेष दर्जे के मुद्दे पर भाजपा तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक अधिकारों और स्वायत्तता के मुद्दों को उठाती रही है, जबकि भाजपा अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के फैसले का समर्थन करती है। ऐसे में विधानसभा के भीतर स्टेटहुड के साथ विशेष दर्जे या ऑटोनॉमी का मुद्दा सामने आने पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया।

सुनील शर्मा ने कहा कि अगर चर्चा केवल जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को लेकर होती है तो भाजपा उससे पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के सभी विधायक इस विषय पर अपना पक्ष रखने को तैयार हैं। उनका कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को स्टेटहुड के मुद्दे पर स्पष्ट चर्चा करनी चाहिए और इसमें दूसरे संवैधानिक विषयों को नहीं जोड़ना चाहिए।

भाजपा नेता ने विशेष रूप से अनुच्छेद 370 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे राज्य के दर्जे की बहाली के साथ जोड़ने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में यदि स्टेटहुड पर प्रस्ताव या चर्चा होती है तो भाजपा उसमें भाग लेने को तैयार है, लेकिन ऑटोनॉमी और विशेष दर्जे को उसी बहस का हिस्सा बनाने का विरोध किया जाएगा।

दूसरी तरफ नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों को लेकर अपना अलग पक्ष रखती आई है। इस कारण विधानसभा में राज्य का दर्जा, विशेष दर्जा और स्वायत्तता जैसे विषय आते ही सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच मतभेद खुलकर सामने आ जाते हैं।

शुक्रवार को सामने आया विवाद भी इसी राजनीतिक मतभेद का हिस्सा है। सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के प्रस्ताव की व्याख्या पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके माध्यम से स्टेटहुड से आगे जाकर ग्रेटर ऑटोनॉमी और विशेष दर्जे की बहाली की बहस शुरू करने की कोशिश की जा रही है। यह भाजपा का आरोप है और इसे मुख्यमंत्री या नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषित रुख से अलग करके देखा जाना जरूरी है।

फिलहाल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख राजनीतिक बहस बन गया है। भाजपा ने जहां राज्य का दर्जा बहाल करने के विषय पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही है, वहीं अनुच्छेद 370 और ऑटोनॉमी को इससे जोड़ने का विरोध किया है। दूसरी ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रही है। ऐसे में विधानसभा के भीतर इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।

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