जम्मू और कश्मीर

राज्य दर्जा बहाली पर डिप्टी CM का बयान

Kavita2
7 Jun 2026 10:16 AM IST
राज्य दर्जा बहाली पर डिप्टी CM का बयान
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Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर के डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुरिंदर कुमार चौधरी ने शनिवार को केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा वापस दिलाने का वादा पूरा नहीं किया गया, तो सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेगी। उनके इस बयान के बाद राज्य का दर्जा बहाली को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

चौधरी ने कहा कि राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग पार्टी का प्रमुख एजेंडा है, जिसे हाल ही में श्रीनगर के दाचीगाम में हुई बैठक में मुख्य प्रस्ताव के रूप में अपनाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा पार्टी की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेगा और इसे लेकर लगातार दबाव बनाया जाएगा।

मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “अगर भारत सरकार जम्मू-कश्मीर से किया गया अपना वादा पूरा नहीं करती और राज्य का दर्जा बहाल नहीं करती है, तो हम जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे और देश को यह बताना होगा कि लोगों से किया गया वादा पूरा नहीं हुआ है।”

डिप्टी सीएम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को आश्वासन दिया था कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा। हालांकि, सरकार बनने के लगभग दो वर्ष बीत जाने के बावजूद यह वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस देरी का सीधा असर क्षेत्र के विकास कार्यों और रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, राज्य का दर्जा न होने के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णयों में सीमितता आ रही है, जिससे युवाओं और विकास योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

चौधरी ने यह भी कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाएगी, लेकिन यदि समाधान नहीं निकला तो पार्टी राष्ट्रीय राजधानी में बड़ा विरोध प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य का दर्जा बहाली का मुद्दा लंबे समय से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में केंद्र और राज्य के बीच प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है। इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी और राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

कुल मिलाकर, डिप्टी सीएम के इस बयान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच टकराव की स्थिति और गहरा सकती है।

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