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लद्दाख हिंसा मामले में युवाओं पर दर्ज केस वापस लेने की मांग, विश्वास बहाली की कोशिश तेज

Kavita2
18 Aug 2026 2:08 PM IST
लद्दाख हिंसा मामले में युवाओं पर दर्ज केस वापस लेने की मांग, विश्वास बहाली की कोशिश तेज
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लेह। लद्दाख में पिछले वर्ष 24 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद युवाओं और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग अब जोर पकड़ रही है। लद्दाख के राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने इस मुद्दे को लगातार उठाते हुए सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

लद्दाख के विभिन्न संगठन दिल्ली में होने वाली निर्णायक बैठक का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है। इसी बीच संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की हाई पावर्ड कमेटी और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत की प्रक्रिया के तहत विश्वास बहाली के लिए दर्ज मामलों को वापस लेना जरूरी है।

संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन के बाद अब भी कई युवाओं को थानों में नियमित हाजिरी देनी पड़ रही है। इससे युवाओं में असंतोष बना हुआ है। उनका मानना है कि यदि सरकार जल्द ही इन मामलों को वापस लेने का फैसला करती है तो इससे लोगों और प्रशासन के बीच भरोसा मजबूत होगा।

लद्दाख में भाजपा समेत कई राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर सक्रिय हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में शांति और विश्वास का माहौल बनाए रखने के लिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने चाहिए। हालांकि, भाजपा विरोधी दल और संगठन इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं और इसे लगातार उठा रहे हैं।

लद्दाख के नेताओं का कहना है कि पिछले वर्ष हुए प्रदर्शन के बाद दर्ज मामलों को लेकर युवाओं में चिंता बनी हुई है। कई लोग लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा सकारात्मक कदम उठाने से स्थिति सामान्य करने में मदद मिल सकती है।

इसी मांग को लेकर लद्दाख के पूर्व भाजपा सांसद थुपस्तान छिवांग और लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) लेह के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद तथा वरिष्ठ भाजपा नेता एडवोकेट ताशी ग्यालसन ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना से मुलाकात की।

बैठक के दौरान नेताओं ने युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विश्वास बहाली के लिए यह कदम जरूरी है। नेताओं ने प्रशासन से अपील की कि मामलों की समीक्षा कर युवाओं को राहत दी जाए।

लद्दाख में पिछले कुछ समय से राजनीतिक और सामाजिक संगठन राज्य के दर्जे, संवैधानिक सुरक्षा और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। इसी क्रम में सितंबर में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे।

प्रदर्शन के बाद दर्ज मामलों को लेकर स्थानीय संगठनों का कहना है कि कई युवा केवल आंदोलन का हिस्सा होने के कारण कानूनी प्रक्रिया में फंस गए हैं। उनका दावा है कि मामलों की समीक्षा कर वास्तविक दोषियों और सामान्य प्रदर्शनकारियों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।

वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। हालांकि, सरकार और लद्दाख के संगठनों के बीच बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर समाधान निकालने की कोशिश जारी है।

हाई पावर्ड कमेटी के साथ होने वाली बैठकों को लेकर लद्दाख में उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार क्षेत्र की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाएगी। संगठनों का कहना है कि बातचीत का माहौल तभी मजबूत होगा, जब विश्वास बहाली के ठोस कदम उठाए जाएंगे।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दर्ज मामलों की वापसी का फैसला लद्दाख में सरकार और स्थानीय लोगों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है। यदि सरकार युवाओं को राहत देती है तो इससे क्षेत्र में तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल लद्दाख में सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि युवाओं पर दर्ज मामलों की जल्द समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और विश्वास का माहौल मजबूत हो सके।

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