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Kashmiri पंडितों के पुनर्वास के लिए शीर्ष समिति फिर से शुरू करने की मांग

Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी ने शनिवार को कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास से जुड़ी शीर्ष समिति को फिर से सक्रिय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की प्रक्रिया को गति देने के लिए यह कदम जरूरी है।
यह समिति वर्ष 2009 में उस समय की जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा गठित की गई थी, जब उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे। इस समिति का उद्देश्य विस्थापित कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी और पुनर्वास की निगरानी करना था। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा घोषित पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी नजर रखना इस समिति के कार्यों में शामिल था।
नासिर असलम वानी ने कहा कि लंबे समय से इस मुद्दे पर ठोस प्रगति नहीं हो पाई है, जिसके चलते पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रिया को एक बार फिर संस्थागत रूप देने की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि समिति को पुनः सक्रिय कर सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
कश्मीरी पंडित समुदाय का एक बड़ा हिस्सा वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहा है और समय-समय पर उनकी सुरक्षित वापसी और पुनर्वास का मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं में प्रमुख रूप से उठता रहा है। कई बार विभिन्न स्तरों पर योजनाएं और पहल शुरू की गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके परिणाम सीमित रहे हैं।
इस पृष्ठभूमि में सलाहकार की यह मांग एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को चर्चा में ले आई है। माना जा रहा है कि यदि समिति को दोबारा सक्रिय किया जाता है, तो इससे पुनर्वास से जुड़ी नीतियों की निगरानी और कार्यान्वयन में तेजी आ सकती है।
फिलहाल इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन प्रशासनिक हलकों में इस पहल को एक संभावित नीतिगत पुनर्विचार के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास से जुड़े प्रयासों को नई दिशा दे सकता है।





