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32 साल बाद MIMC पहुंचे दलाई लामा, दिया आशीर्वाद

Kavita2
10 Aug 2026 10:32 AM IST
32 साल बाद MIMC पहुंचे दलाई लामा, दिया आशीर्वाद
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लेह। बौद्ध आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने रविवार को महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (MIMC) के देवाचन कैंपस का दौरा किया। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि करीब 32 वर्ष पहले उन्होंने इसी संस्थान का उद्घाटन किया था। रविवार को जब वह दोबारा कैंपस पहुंचे तो उनके पुराने जुड़ाव और संस्थान की अब तक की यात्रा को याद किया गया।

दलाई लामा ने पहली बार वर्ष 1994 में इस स्थान का दौरा किया था। उस समय महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर भविष्य की एक परिकल्पना के रूप में आकार ले रहा था। उन्होंने उसी दौरान केंद्र का उद्घाटन किया था। तीन दशक से अधिक समय बाद उनके दोबारा यहां पहुंचने को संस्थान के लिए एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

1994 में रखी थी संस्थान की नींव

महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर की स्थापना का उद्देश्य आध्यात्मिक साधना के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और मानवीय गतिविधियों को बढ़ावा देना रहा है। वर्ष 1994 में जब दलाई लामा पहली बार इस स्थान पर पहुंचे थे, तब संस्थान की गतिविधियां शुरुआती चरण में थीं।

उस समय यह स्थान भविष्य की एक सोच के रूप में देखा जा रहा था। दलाई लामा ने केंद्र का उद्घाटन कर इसकी यात्रा को आशीर्वाद दिया था। इसके बाद वर्षों के दौरान MIMC ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ध्यान, मानवीय सेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया।

रविवार को दलाई लामा का उसी परिसर में लौटना संस्थान की इस लंबी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

संस्थान की प्रगति को दिया आशीर्वाद

लद्दाख प्रशासन के एक प्रवक्ता के अनुसार, आध्यात्मिक गुरु ने देवाचन कैंपस की यात्रा के दौरान संस्थान की निरंतर प्रगति और उसके सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यों के लिए आशीर्वाद दिया।

प्रवक्ता ने बताया कि संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ध्यान, मानवीय सेवा, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, विश्व शांति और सभी के प्रति करुणा की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

दलाई लामा का संदेश भी लंबे समय से करुणा, शांति और मानवता के मूल्यों पर केंद्रित रहा है। ऐसे में MIMC की गतिविधियों में भी इन मूल्यों को प्रमुखता दिया जाना इस यात्रा के महत्व को और बढ़ाता है।

ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र

MIMC के कार्यों में ध्यान और आध्यात्मिक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण स्थान है। देवाचन कैंपस को भी आध्यात्मिक अभ्यास और ध्यान से जुड़े कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

लद्दाख जैसे क्षेत्र में बौद्ध परंपरा और आध्यात्मिक गतिविधियों का ऐतिहासिक महत्व है। यहां आने वाले लोग ध्यान, आध्यात्मिक अध्ययन और बौद्ध दर्शन से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेते हैं।

दलाई लामा की यात्रा ने इन गतिविधियों से जुड़े लोगों और संस्थान से जुड़े सदस्यों के लिए विशेष महत्व रखा। तीन दशक से अधिक समय पहले संस्थान की शुरुआत के समय उनका आना और अब उसकी प्रगति देखने के लिए लौटना MIMC की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर भी जोर

MIMC की गतिविधियां केवल ध्यान और आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं हैं। संस्थान शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी काम करता रहा है। इसके अलावा मानवीय सेवा और समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सहायता पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास किए जाते हैं।

दलाई लामा ने कैंपस की यात्रा के दौरान संस्थान के इन्हीं व्यापक उद्देश्यों को लेकर आशीर्वाद दिया। शिक्षा और स्वास्थ्य को आध्यात्मिक विकास के साथ जोड़ना समाज के समग्र कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रयास

लद्दाख की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताओं में शामिल है।

लद्दाख प्रशासन के प्रवक्ता ने MIMC की यात्रा का उल्लेख करते हुए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी संस्थान की निरंतर यात्रा का हिस्सा बताया। इससे यह संकेत मिलता है कि आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी संस्थान के काम में महत्व दिया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस संदर्भ में स्थानीय स्तर पर जागरूकता और जिम्मेदार गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

विश्व शांति और करुणा का संदेश

दलाई लामा की शिक्षाओं में विश्व शांति और करुणा को विशेष महत्व दिया जाता रहा है। रविवार को MIMC के देवाचन कैंपस की यात्रा के दौरान भी संस्थान की गतिविधियों में इन मूल्यों की भूमिका को रेखांकित किया गया।

संस्थान की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, ध्यान और मानवीय सेवा को बढ़ावा देने के साथ समाज में करुणा और शांति के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। दलाई लामा का आशीर्वाद इस उद्देश्य के लिए प्रेरणा के रूप में देखा गया।

32 साल की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव

दलाई लामा की इस यात्रा को MIMC के लिए 32 वर्षों की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है। वर्ष 1994 में जब उन्होंने संस्थान का उद्घाटन किया था, तब यह भविष्य की एक सोच थी। आज वही संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ध्यान, मानवीय सेवा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां संचालित कर रहा है।

इस तरह दलाई लामा का रविवार को देवाचन कैंपस लौटना केवल एक आध्यात्मिक यात्रा नहीं, बल्कि संस्थान के विकास और उसके उद्देश्यों की लंबी यात्रा की याद भी बना।

लद्दाख प्रशासन के प्रवक्ता के मुताबिक, आध्यात्मिक गुरु ने संस्थान की आगे की यात्रा के लिए आशीर्वाद दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ध्यान, मानवीय सेवा, पर्यावरण संरक्षण, विश्व शांति और करुणा जैसे विषयों पर केंद्रित MIMC की गतिविधियों को उनके आशीर्वाद से नई प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।

करीब तीन दशक पहले शुरू हुई इस यात्रा में दलाई लामा का दोबारा उसी परिसर में पहुंचना संस्थान के इतिहास का खास अवसर रहा। उनके दौरे ने न केवल पुराने संबंधों को फिर से जीवंत किया, बल्कि आने वाले समय में संस्थान की सामाजिक और आध्यात्मिक भूमिका को भी रेखांकित किया।

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