जम्मू और कश्मीर

उमर अब्दुल्ला सरकार पर संकट, 25 विधायकों की बगावत

Kavita2
6 Nov 2026 10:18 AM IST
उमर अब्दुल्ला सरकार पर संकट, 25 विधायकों की बगावत
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी कलह लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के कई विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। असंतुष्ट विधायकों की लगातार हो रही बैठकों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। अब खबर है कि शुक्रवार, 6 नवंबर को नाराज विधायक नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात कर सकते हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भी शामिल होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व इस बातचीत के जरिए विधायकों की नाराजगी दूर करने और संगठन में बढ़ते असंतोष को शांत करने की कोशिश करेगा।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष सामने आया था। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल में चार नए चेहरों को जगह दी थी। इनमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कई वरिष्ठ विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज हैं। उनका मानना है कि पार्टी के लिए लंबे समय से काम कर रहे नेताओं की अनदेखी की गई है।

इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के करीब 25 असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। दावा है कि निर्धारित समय में मांगों पर फैसला नहीं होने की स्थिति में ये विधायक सरकार से समर्थन वापस लेने जैसा कदम उठा सकते हैं। हालांकि, 25 विधायकों के संयुक्त अल्टीमेटम और समर्थन वापसी की चेतावनी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में देखा जा रहा है।

नाराज विधायकों की मांगों में मंत्रिमंडल की संरचना पर दोबारा विचार करना प्रमुख बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, असंतुष्ट नेता मंत्रियों के चयन की प्रक्रिया और मुख्यमंत्री के सलाहकारों की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में विधायकों की राय को पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए। बताया जा रहा है कि इन मांगों को लेकर पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने विस्तृत प्रस्ताव रखा जा सकता है।

श्रीनगर में पिछले कुछ दिनों से असंतुष्ट विधायकों की कई बैठकें हो चुकी हैं। गुरुवार को हुई बैठक में 15 नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों और एक निर्दलीय विधायक सहित कुल 16 विधायकों की मौजूदगी की खबर सामने आई। बैठक देर रात तक चली और इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से बातचीत के दौरान अपनी शिकायतें एक साथ रखने पर सहमति जताई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नाराज विधायकों में हसनैन मसूदी, मुबारक गुल, नजीर अहमद खान गुरेजी, एजाज जान, फारूक अहमद शाह, अब्दुल मजीद लारमी और बशीर अहमद वीरी जैसे नेताओं के नाम सामने आए हैं। इन बैठकों में विधायकों ने अपने राजनीतिक भविष्य और पार्टी के भीतर अपनी भूमिका को लेकर चर्चा की है। हालांकि, सभी विधायकों की नाराजगी के कारण एक जैसे नहीं बताए जा रहे हैं।

पार्टी नेतृत्व ने भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता असंतुष्ट विधायकों से संपर्क बनाए हुए हैं। हजरतबल से विधायक सलमान अली सागर ने संकेत दिया है कि पार्टी नेतृत्व की ओर से नाराज विधायकों से बातचीत की पहल की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए मतभेद दूर किए जा सकते हैं।

फारूक अब्दुल्ला की प्रस्तावित बैठक को इस राजनीतिक घटनाक्रम में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ फारूक अब्दुल्ला संगठन में प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वह नाराज विधायकों की शिकायतों को सुनकर कोई ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश करेंगे, जिससे पार्टी में एकजुटता बनी रहे।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए भी यह घटनाक्रम राजनीतिक चुनौती बन गया है। एक तरफ उन्हें सरकार चलाने और प्रशासनिक फैसले लेने की जिम्मेदारी निभानी है, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के विधायकों को संतुष्ट रखना भी जरूरी हो गया है। यदि नाराजगी लंबे समय तक बनी रहती है तो सरकार के कामकाज और विधानसभा के भीतर राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उमर अब्दुल्ला सरकार तत्काल बहुमत के संकट में है। विधायकों के असंतोष और सरकार से औपचारिक रूप से समर्थन वापस लेने के बीच बड़ा अंतर है। अब तक किसी बड़े समूह द्वारा समर्थन वापसी की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेताओं की नाराजगी किसी भी राजनीतिक दल के लिए असामान्य नहीं है, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में विधायकों का असंतुष्ट होना नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा सकता है। ऐसे मामलों में संगठनात्मक बातचीत और जिम्मेदारियों के संतुलित वितरण की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

फिलहाल सबकी निगाहें शुक्रवार को प्रस्तावित बैठक पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला नाराज विधायकों को मनाने में सफल होते हैं या फिर पार्टी के भीतर मतभेद और गहराते हैं। इस बैठक के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में चल रही अंदरूनी खींचतान सुलह की ओर बढ़ेगी या जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कोई नया मोड़ आएगा।

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