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जम्मू। अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं बरसी के मौके पर जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। जहां क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने 5 अगस्त 2019 के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया, वहीं जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस फैसले के बाद सुरक्षा स्थिति में आए बदलाव का जिक्र किया।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद “पड़ोसी देश और घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की कोशिशों को नाकाम कर दिया गया है।” उन्होंने यह बात आतंकवादियों के हमलों में मारे गए नागरिकों के परिवारों के 37 सदस्यों को नियुक्ति पत्र सौंपने के कार्यक्रम के दौरान कही।
आतंकवाद प्रभावित परिवारों को सौंपे नियुक्ति पत्र
उपराज्यपाल ने आतंकवादी घटनाओं में जान गंवाने वाले नागरिकों के परिवारों के सदस्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने जम्मू-कश्मीर में कई परिवारों को प्रभावित किया है। ऐसे परिवारों को सम्मानजनक जीवन और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
5 अगस्त 2019 के फैसले की सातवीं बरसी
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने का फैसला लिया था। बुधवार को इस फैसले के सात साल पूरे हुए।
इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने रुख के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए। कुछ क्षेत्रीय दलों ने फैसले का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया और इसे जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति से जोड़कर देखा।
वहीं, केंद्र और प्रशासन से जुड़े नेताओं ने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद हुए बदलावों को विकास और सुरक्षा से जोड़कर पेश किया।
आतंकी नेटवर्क पर कार्रवाई का दावा
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश और स्थानीय आतंकी नेटवर्क की कोशिशों को लगातार विफल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के समन्वय से आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी है।
विकास और शांति पर जोर
उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास को लेकर प्रशासन की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता, रोजगार और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने आतंकवाद के कारण अपनों को खोया है, उनके प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें हर संभव सहयोग दिया जाए।
राजनीतिक दलों ने जताया विरोध
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले का विरोध करने वाले क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने बुधवार को प्रदर्शन किया। इन दलों का कहना है कि 2019 का फैसला जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक और संवैधानिक स्थिति में बड़ा बदलाव था, जिसे लेकर उनकी असहमति बनी हुई है।
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने राज्य के अधिकारों और राजनीतिक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए। कई दल लंबे समय से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी कर रहे हैं।
सुरक्षा और राजनीति के बीच जारी बहस
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, विकास और राजनीतिक अधिकारों को लेकर बहस जारी है। केंद्र सरकार और प्रशासन इसे आतंकवाद पर नियंत्रण, निवेश और विकास के अवसरों से जोड़ते हैं।
वहीं, कुछ राजनीतिक दल इसे क्षेत्र की पहचान और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। सातवीं बरसी पर भी दोनों पक्षों के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए।
प्रशासन की आगे की रणनीति
उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास की प्रक्रिया जारी रहेगी। उन्होंने आतंकवाद प्रभावित परिवारों की सहायता और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं बरसी पर जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आए। जहां क्षेत्रीय दलों ने फैसले का विरोध किया, वहीं उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इसे सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अहम कदम बताया।





