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जम्मू-कश्मीर में स्कूल किताब को लेकर विवाद, BJP ने लगाया “एकेडमिक जिहाद” का आरोप

Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी एक किताब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले ने शिक्षा सामग्री और पाठ्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे प्रकरण को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
BJP ने आरोप लगाया है कि सरकार “एकेडमिक जिहाद” को बढ़ावा दे रही है और इस मामले में शामिल पुस्तक पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की पक्षपातपूर्ण या विवादित सामग्री को जगह नहीं दी जानी चाहिए।
विवाद का केंद्र “पर्सनैलिटीज़ एंड लेजेंड्स ऑफ़ J&K” नामक पुस्तक है, जिसे लेकर विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस पुस्तक को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद ही सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में शामिल करने की मंजूरी दी गई थी।
सुनील शर्मा के अनुसार, यह निर्णय प्रक्रिया सवालों के घेरे में है और इस पर पारदर्शिता की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की पुस्तकों के चयन से छात्रों की शिक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है और यह मुद्दा गंभीर जांच का विषय होना चाहिए।
दूसरी ओर, इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। BJP का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी तरह की विचारधारात्मक घुसपैठ स्वीकार्य नहीं है और सरकार को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि स्कूलों में रखी जाने वाली किताबों का चयन पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, ताकि छात्रों को संतुलित और तथ्यात्मक जानकारी मिल सके।
हालांकि इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पुस्तकों का चयन एक निर्धारित प्रक्रिया और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किया जाता है।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस तरह के विवाद अक्सर तब सामने आते हैं जब पाठ्य सामग्री के चयन को लेकर राजनीतिक दृष्टिकोण हावी हो जाता है। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान और समझ को बढ़ाना होना चाहिए, न कि विवाद को बढ़ावा देना।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में शामिल की जाने वाली पुस्तकों की समीक्षा प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और संतुलित है।
वर्तमान स्थिति में यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने की संभावना है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिससे यह मुद्दा अब शिक्षा से आगे बढ़कर राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में इस किताब को लेकर उठा विवाद न केवल शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि शैक्षणिक सामग्री का चयन अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है।





