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जम्मू और कश्मीर
कांग्रेस ने SMVDSB के CEO के व्यवहार पर उठाए सवाल
Ratna Netam
9 April 2026 3:56 PM IST

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JAMMU.जम्मू: जम्मू में कांग्रेस पार्टी ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) के CEO के हालिया व्यवहार और निर्णयों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि CEO अपने पद की गरिमा और संगठन के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं और इस कारण वे SMVDSB का नेतृत्व करने के लिए अयोग्य हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि SMVDSB एक महत्वपूर्ण धार्मिक और प्रशासनिक संस्था है, और इसके CEO का व्यवहार संगठन की प्रतिष्ठा के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि CEO ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो बोर्ड के कर्मचारियों और श्रद्धालुओं के हित में नहीं हैं। पार्टी का कहना है कि यह व्यवहार संगठन के पारदर्शी और जिम्मेदार प्रशासन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि CEO ने अपने पद का उपयोग व्यक्तिगत निर्णयों और अनावश्यक विवाद पैदा करने के लिए किया है। उन्होंने मांग की कि उच्च स्तर की जांच कर CEO की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता की समीक्षा की जाए। इसके अलावा, पार्टी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो वे राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर इस मुद्दे को उठाएंगे।
स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने कहा, “SMVDSB का CEO केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए भी जिम्मेदार है। अगर नेतृत्व ठीक नहीं होगा, तो इसका असर श्रद्धालुओं और कर्मचारियों पर पड़ेगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि बोर्ड के कर्मचारी और श्रद्धालु CEO की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं और कई मामलों में विरोध जताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विवाद से संस्थागत कामकाज प्रभावित हो सकता है। SMVDSB जैसे बड़े धार्मिक बोर्ड में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद आवश्यक है। CEO की अयोग्यता पर उठाए गए सवाल संगठन में प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता को उजागर करते हैं।
बोर्ड के अधिकारी अभी इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दे रहे हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार CEO को अपने फैसलों की समीक्षा और कर्मचारियों और हितधारकों के साथ संवाद बढ़ाने की सलाह दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस का यह कदम आगामी चुनावी माहौल में संगठन और धर्म-संस्थाओं के प्रशासनिक मुद्दों को केंद्र में लाने की रणनीति भी हो सकता है।
इस विवाद ने SMVDSB में नेतृत्व और प्रशासनिक पारदर्शिता के सवाल को फिर से उठाया है। श्रद्धालु और स्थानीय समुदाय इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं, और बोर्ड के फैसलों की निगरानी कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि संगठन के हित में अगर सुधार नहीं हुआ तो वे आवाज उठाने में पीछे नहीं हटेंगे।
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