जम्मू और कश्मीर

Rajouri MLA के मामले में कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की

Ratna Netam
9 April 2026 5:23 PM IST
Rajouri MLA के मामले में कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की
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JAMMU.जम्मू: कांग्रेस पार्टी ने राजौरी के एक विधायक के खिलाफ कथित बदले की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उठाया गया है और इसका उद्देश्य विपक्ष की आवाज को दबाना है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एक बयान जारी कर कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजौरी के विधायक के खिलाफ की गई कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं लगती, जिससे राजनीतिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
पार्टी ने कहा, “हम इस तरह की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।” कांग्रेस नेताओं ने सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई गलत कार्रवाई हुई है तो उसे वापस लिया जाए। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को विभिन्न तरीकों से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरा है और इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है। दूसरी ओर, संबंधित अधिकारियों ने कहा कि कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और यदि किसी के खिलाफ शिकायत या आरोप हैं, तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाती है।
इस मुद्दे ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है ताकि जनता का विश्वास बना रहे। कांग्रेस ने अंत में कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर आगे भी अपनी आवाज उठाती रहेगी और जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन भी करेगी। पार्टी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा बनाए रखें। अंततः, राजौरी विधायक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उठे विवाद ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं और क्या इस विवाद का समाधान निष्पक्ष तरीके से हो पाता है।
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