जम्मू और कश्मीर

23 दिन में 20 चोटियां फतह कर्नल जम्वाल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

Kavita2
7 Sept 2026 11:56 AM IST
23 दिन में 20 चोटियां फतह कर्नल जम्वाल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
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जम्मू। पर्वतारोहण की दुनिया में भारत के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। जम्मू के सांबा जिले के रहने वाले कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल ने महज 23 दिनों में 6,000 मीटर से अधिक ऊंची 20 चोटियों पर पहली बार आरोहण दर्ज कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। उनके नेतृत्व में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स (NIMAS), दिरांग की टीम ने लद्दाख में ऐतिहासिक ‘फर्स्ट एसेंट माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशन’ सफलतापूर्वक पूरा किया। अभियान के दौरान 20 ऐसी चोटियों पर 20 प्रथम रिकॉर्डेड समिट दर्ज किए गए, जिन पर इससे पहले दर्ज आरोहण नहीं हुआ था।

किसी पर्वतारोही के लिए 6,000 मीटर ऊंची एक चोटी पर पहुंचना भी बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, बेहद कम तापमान, तेज हवाएं और लगातार बदलता मौसम पर्वतारोहियों की परीक्षा लेते हैं। ऐसे में केवल 23 दिनों में 20 अलग-अलग चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंचना इस अभियान को असाधारण बनाता है।

इस अभियान का नेतृत्व कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल ने किया। वह सांबा जिले के गांव बढ़ोरी के रहने वाले हैं और लंबे समय से पर्वतारोहण तथा साहसिक अभियानों से जुड़े हुए हैं। उनकी इस उपलब्धि से जम्मू-कश्मीर के साथ देश का नाम भी अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत में रोशन हुआ है।

कर्नल जम्वाल के नेतृत्व वाली NIMAS टीम ने लद्दाख के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में यह अभियान पूरा किया। यहां ऊंचाई के साथ मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां पर्वतारोहियों के सामने बड़ी चुनौती पेश करती हैं।

अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि टीम ने पहले से लोकप्रिय या नियमित रूप से चढ़ी जाने वाली चोटियों के बजाय 20 अरोहित चोटियों को लक्ष्य बनाया। इन चोटियों पर पहली बार रिकॉर्डेड समिट दर्ज करने का दावा किया गया है।

फर्स्ट एसेंट का पर्वतारोहण में विशेष महत्व होता है। किसी ऐसी चोटी पर पहली बार सफल आरोहण करना, जहां पहले किसी अभियान का रिकॉर्ड मौजूद न हो, केवल शारीरिक क्षमता का मामला नहीं होता। इसके लिए रास्ते की पहचान से लेकर तकनीकी कठिनाइयों का आकलन तक टीम को स्वयं करना पड़ता है।

पहले से चढ़ी गई चोटियों के लिए कई बार पुराने अभियानों के अनुभव, मार्ग और भौगोलिक जानकारी उपलब्ध होती है। लेकिन अरोहित चोटियों पर ऐसी जानकारी सीमित या उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में अभियान दल को हर कदम पर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

कर्नल जम्वाल और उनकी टीम ने इन्हीं कठिन परिस्थितियों के बीच 23 दिनों में लगातार 20 चोटियों पर सफलता हासिल की। इसका मतलब औसतन लगभग हर दिन एक नई ऊंचाई और नई चुनौती का सामना करना था।

6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर शरीर को सामान्य परिस्थितियों की तुलना में काफी कम ऑक्सीजन मिलती है। इससे थकान तेजी से बढ़ सकती है और ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम रहता है। पर्वतारोहियों को ऐसी परिस्थितियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और अनुकूलन की आवश्यकता होती है।

लद्दाख का भूगोल इस चुनौती को और कठिन बनाता है। ऊंचे पहाड़, बर्फ, चट्टानी इलाके और तेजी से बदलने वाला मौसम किसी भी अभियान की गति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे वातावरण में लगातार कई चोटियों पर चढ़ना टीम के अनुशासन और योजना की बड़ी परीक्षा थी।

कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल की यह सफलता अचानक हासिल हुई उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे उनका 23 वर्षों से अधिक का पर्वतारोहण अनुभव है। वह अब तक 80 से अधिक अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं।

दो दशकों से अधिक के अनुभव ने उन्हें अलग-अलग ऊंचाइयों, मौसम और पर्वतीय परिस्थितियों में काम करने का अवसर दिया है। यही अनुभव लद्दाख के इस अभियान के दौरान टीम का नेतृत्व करने में महत्वपूर्ण रहा।

पर्वतारोहण में टीमवर्क की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी किसी एक पर्वतारोही की क्षमता। ऊंचाई पर प्रत्येक सदस्य की सुरक्षा और सफलता दूसरे सदस्यों के सहयोग पर निर्भर करती है।

NIMAS की टीम ने पूरे अभियान के दौरान समन्वय के साथ 20 चोटियों पर आरोहण पूरा किया। सीमित समय में लगातार नई चोटियों की ओर बढ़ना शारीरिक सहनशक्ति के साथ मजबूत मानसिक तैयारी की भी मांग करता है।

कर्नल जम्वाल का संबंध जम्मू के सांबा जिले के बढ़ोरी गांव से है। उनके विश्व रिकॉर्ड की खबर से स्थानीय स्तर पर भी खुशी का माहौल है। एक छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक पर्वतारोहण जगत में पहचान बनाना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय बन सकता है।

उनकी उपलब्धि युवाओं को साहसिक खेलों की तरफ आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। भारत में पर्वतारोहण, ट्रैकिंग और अन्य एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रति युवाओं की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

NIMAS जैसे संस्थान पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दिरांग स्थित यह संस्थान युवाओं और साहसिक खेलों से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षण देने के लिए जाना जाता है।

इस अभियान की सफलता से भारतीय पर्वतारोहण की क्षमताओं का भी प्रदर्शन हुआ है। हिमालयी क्षेत्रों में अभी भी ऐसी कई चोटियां और मार्ग मौजूद हैं जहां पर्वतारोहण अभियानों की संभावनाएं हैं।

फर्स्ट एसेंट अभियानों से पर्वतीय क्षेत्रों के बारे में नई भौगोलिक और तकनीकी जानकारी भी सामने आती है। नए मार्गों की पहचान भविष्य के पर्वतारोहियों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी हो सकती है।

कर्नल जम्वाल की सफलता के पीछे वर्षों की तैयारी, अनुशासन और लगातार अभियानों से हासिल अनुभव महत्वपूर्ण रहा। 80 से अधिक पर्वतारोहण अभियानों के बाद 20 अरोहित चोटियों पर एक ही अभियान के दौरान प्रथम आरोहण दर्ज करना उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हो गया है।

23 दिनों की अवधि में इस उपलब्धि को हासिल करना इसे और खास बनाता है। सामान्य परिस्थितियों में भी इतने कम समय में लगातार पर्वतारोहण करना आसान नहीं है। 6,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर शरीर को आराम और अनुकूलन के लिए पर्याप्त समय देना पड़ता है।

ऐसे में अभियान की योजना, मौसम का आकलन और प्रत्येक सदस्य की शारीरिक स्थिति की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण रही होगी। किसी एक चरण में मौसम खराब होने या सदस्य के स्वास्थ्य पर असर पड़ने से पूरे अभियान की समयसीमा प्रभावित हो सकती थी।

इस रिकॉर्ड के साथ कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल ने एक बार फिर अपनी पर्वतारोहण क्षमता का परिचय दिया है। सांबा जिले के बढ़ोरी गांव से निकले कर्नल जम्वाल की उपलब्धि ने जम्मू-कश्मीर के साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया है।

लद्दाख की 6,000 मीटर से अधिक ऊंची 20 अरोहित चोटियों पर केवल 23 दिनों में प्रथम रिकॉर्डेड समिट दर्ज करने वाला यह अभियान भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। दो दशक से अधिक का अनुभव और 80 से ज्यादा अभियानों की यात्रा के बाद हासिल यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के पर्वतारोहियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

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