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जम्मू और कश्मीर
वंदे मातरम विवाद में CM के तेवर तल्ख कांग्रेस से मांगा जवाब
Ratna Netam
11 Sept 2026 7:51 PM IST

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श्रीनगर। राष्ट्रीय गीत **‘वंदे मातरम्’** के पूर्ण संस्करण को लेकर INDIA गठबंधन के दो सहयोगी दल कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस आमने-सामने आ गए हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि अगर पार्टी को नए नियम से इतनी ही आपत्ति थी तो उसने इसे संसद में क्यों नहीं रोका? उन्होंने कहा कि अब जो नियम लागू है, उनकी सरकार उसका पालन कर रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो पदों को गाने की ऐतिहासिक परंपरा का सम्मान होना चाहिए। इस विवाद ने INDIA गठबंधन के भीतर नए राजनीतिक मतभेद को सामने ला दिया है।
विवाद की शुरुआत श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन कार्यक्रम से हुई। समारोह में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला कार्यक्रम में मौजूद रहे। इसके बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आपत्ति जताते हुए सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस को केवल शुरुआती दो पदों वाले संस्करण के इस्तेमाल की सलाह दी।
श्रीनगर के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
श्रीनगर में आयोजित फिल्म फेस्टिवल में वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण बजाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हुआ।
कार्यक्रम के दौरान फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला राष्ट्रीय गीत के सम्मान में खड़े रहे।
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी पार्टी उस ऐतिहासिक रुख के साथ खड़ी है जिसमें वंदे मातरम् के शुरुआती दो पदों को स्वीकार किया गया था।
उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद और दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं का भी हवाला दिया।
कांग्रेस का तर्क है कि शुरुआती दो पदों वाला स्वरूप भारत की बहुलतावादी और समावेशी सोच के अनुरूप है।
उमर अब्दुल्ला का कांग्रेस पर पलटवार
कांग्रेस की आपत्ति के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखा जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को नियम से समस्या थी तो उसे संसद में ही इसे रोकना चाहिए था।
उनके मुताबिक अब नियम लागू हो चुका है और सरकार उसी का पालन कर रही है।
उमर ने कहा कि यह केवल जम्मू-कश्मीर के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए लागू व्यवस्था है।
उन्होंने कांग्रेस शासित राज्यों का भी जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी यही नियम लागू होता है।
उमर अब्दुल्ला ने यहां तक सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर चाहती क्या है—क्या कश्मीरियों को इस मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े?
'सत्ता में आएं और बदल दें'
उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को यह भी कहा कि अगर उसे मौजूदा व्यवस्था पसंद नहीं है तो वह सत्ता में आने के बाद इसे बदल सकती है।
उनका तर्क था कि एक सरकार के रूप में उन्हें मौजूदा नियमों का पालन करना होगा।
यानी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस विवाद में अपनी स्थिति को वैचारिक समर्थन के बजाय कानूनी अनुपालन के रूप में पेश करने की कोशिश की है।
इससे कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच विवाद और दिलचस्प हो गया है।
दोनों पार्टियां INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन वंदे मातरम् के मुद्दे पर उनके सार्वजनिक बयान एक-दूसरे से अलग दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को लेकर अपनी पार्टी का पुराना रुख दोहराया।
उनका कहना था कि स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने ऐतिहासिक रूप से इसके शुरुआती दो पदों को स्वीकार करने का फैसला किया था।
कांग्रेस इसी फैसले का सम्मान करने की बात कर रही है।
वेणुगोपाल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को भी इसी रुख के साथ खड़े होने की सलाह दी।
लेकिन यही सलाह गठबंधन सहयोगी को पसंद नहीं आई।
नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से साफ कहा गया कि कोई गठबंधन सहयोगी यह तय नहीं कर सकता कि दूसरा दल क्या गाएगा और कितना गाएगा।
NC बोली- शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता बशीर अहमद ने कांग्रेस की टिप्पणी पर कहा कि गठबंधन में होने का मतलब यह नहीं है कि एक पार्टी दूसरी पार्टी पर अपनी शर्तें थोपे।
उन्होंने कहा कि केसी वेणुगोपाल को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन वह अपनी राय दूसरे सहयोगियों पर नहीं थोप सकते।
एनसी ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक स्वतंत्रता और पसंद के सवाल से भी जोड़ा।
इस बयान के बाद मामला केवल वंदे मातरम् तक सीमित नहीं रहा बल्कि INDIA गठबंधन के अंदर सहयोगी दलों के संबंधों पर भी सवाल उठने लगे।
कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के वीडियो से पलटवार
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस पर पलटवार करने के लिए उसके अपने मुख्यमंत्रियों के उदाहरण सामने रखे।
एनसी नेता तनवीर सादिक ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुड़े वीडियो साझा किए।
पार्टी ने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस शासित राज्यों में वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाया जा रहा है तो जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस पर सवाल क्यों उठाया जा रहा है।
इससे कांग्रेस के सामने अपने रुख की एकरूपता को लेकर नया राजनीतिक सवाल खड़ा हो गया।
कर्नाटक ने जारी किया नया प्रोटोकॉल
इसी विवाद के बीच कर्नाटक सरकार ने वंदे मातरम् के गायन को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है।
इसके मुताबिक राज्य सरकार के नियमित कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के शुरुआती दो पद गाए जाएंगे।
वहीं राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की मौजूदगी वाले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में पूर्ण संस्करण गाया जाएगा।
कर्नाटक के इस फैसले ने विवाद को और व्यापक बना दिया है क्योंकि अब वंदे मातरम् को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और राज्यों के रुख की तुलना की जा रही है।
INDIA गठबंधन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है विवाद?
कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस केवल दो अलग राजनीतिक दल नहीं हैं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी INDIA गठबंधन के सहयोगी भी हैं।
जम्मू-कश्मीर में दोनों दल भाजपा के खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक स्पेस साझा करते रहे हैं।
ऐसे में राष्ट्रीय प्रतीक और राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील विषय पर सार्वजनिक टकराव गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा करता है।
राजनीतिक विरोधियों को भी इससे INDIA गठबंधन पर हमला करने का मौका मिल गया है।
भाजपा पहले से ही कांग्रेस के रुख को लेकर तीखे सवाल उठा रही है।
भाजपा भी विवाद में कूदी
भाजपा ने कांग्रेस की आपत्ति को लेकर जोरदार हमला बोला है।
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के रवैये की आलोचना करते हुए इसे '21वीं सदी की मुस्लिम लीग' जैसा बताया।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस वंदे मातरम् के पूर्ण गायन का विरोध कर रही है जबकि उसके कई सहयोगी और कांग्रेस शासित राज्यों के नेता अलग व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं।
इस तरह भाजपा इस विवाद को कांग्रेस के खिलाफ बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती
इस विवाद में कांग्रेस के सामने एक तरफ अपने ऐतिहासिक रुख का बचाव करने की चुनौती है और दूसरी तरफ गठबंधन सहयोगियों को साथ रखने की।
कांग्रेस अगर अपने रुख पर ज्यादा सख्ती दिखाती है तो नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ सकता है।
अगर वह पीछे हटती है तो भाजपा उसे राजनीतिक दबाव में झुकने के रूप में पेश कर सकती है।
यही वजह है कि वंदे मातरम् का विवाद राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े वैचारिक मुद्दे का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
PDP ने भी साधा निशाना
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी PDP ने भी इस विवाद में नेशनल कॉन्फ्रेंस को घेरने की कोशिश की है।
PDP ने एनसी के रुख पर सवाल उठाए और इसे भाजपा के एजेंडे से जोड़ने का प्रयास किया।
इससे जम्मू-कश्मीर में मामला तीन तरफा राजनीतिक संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस ने एनसी से सवाल किया, एनसी ने कांग्रेस को जवाब दिया और PDP ने दोनों के बीच पैदा हुए विवाद को अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
वंदे मातरम् का इतिहास
वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।
यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल हुआ और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का महत्वपूर्ण उद्घोष बना।
आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम् ने हजारों स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया।
लेकिन इसके अलग-अलग पदों को लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के समय भी बहस हुई थी।
कांग्रेस इसी ऐतिहासिक बहस का हवाला देते हुए शुरुआती दो पदों को स्वीकार किए जाने की परंपरा की बात कर रही है।
यही ऐतिहासिक संदर्भ मौजूदा विवाद के केंद्र में है।
सवाल केवल गीत का नहीं राजनीति का भी
मौजूदा विवाद में सवाल केवल यह नहीं है कि वंदे मातरम् के कितने पद गाए जाएं।
इसके साथ राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, ऐतिहासिक परंपरा, कानून और गठबंधन राजनीति जैसे कई मुद्दे जुड़ गए हैं।
कांग्रेस इसे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा तय ऐतिहासिक समझ के सम्मान से जोड़ रही है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि वह मौजूदा व्यवस्था का पालन कर रही है और सहयोगी दल उस पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकते।
भाजपा इसे राष्ट्रगीत के सम्मान का मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर हमला कर रही है।
इसी कारण विवाद तेजी से राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में बदल गया है।
क्या INDIA गठबंधन में बढ़ेगी दूरी?
फिलहाल इस मुद्दे पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच बयानबाजी तेज जरूर है, लेकिन इसे गठबंधन टूटने जैसी स्थिति कहना जल्दबाजी होगी।
INDIA गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच पहले भी कई नीतिगत और राजनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग राय सामने आती रही है।
हालांकि वंदे मातरम् का मामला भावनात्मक और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ा होने के कारण इसका राजनीतिक असर दूसरे विवादों की तुलना में ज्यादा हो सकता है।
आने वाले दिनों में दोनों दल अपने बयानों को नरम करते हैं या विवाद और बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी।
उमर के सवाल ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल
इस पूरे विवाद में उमर अब्दुल्ला का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल कांग्रेस के संसद वाले रुख को लेकर है।
उनका कहना है कि अगर कांग्रेस मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ थी तो उसे इसे बनने के समय रोकना चाहिए था।
अब सरकार से नियम का उल्लंघन करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
कांग्रेस दूसरी तरफ ऐतिहासिक फैसले और समावेशी परंपरा का हवाला देकर अपना विरोध दर्ज करा रही है।
यही दोनों पक्षों के बीच असली टकराव है।
अभी थमता नहीं दिख रहा विवाद
वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ यह विवाद फिलहाल थमता दिखाई नहीं दे रहा है।
कांग्रेस केसी वेणुगोपाल के बयान के जरिए अपने ऐतिहासिक रुख पर कायम है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस कांग्रेस को सहयोगियों पर शर्तें न थोपने की नसीहत दे रही है।
उमर अब्दुल्ला ने संसद में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाकर विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
भाजपा इसे कांग्रेस के खिलाफ राष्ट्रवाद के मुद्दे के रूप में उठा रही है, जबकि जम्मू-कश्मीर की दूसरी पार्टियां भी इसमें राजनीतिक अवसर तलाश रही हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में वंदे मातरम् का यह विवाद केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित रहने के बजाय राष्ट्रीय राजनीति में और तेज हो सकता है।
फिलहाल **मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कांग्रेस से यही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—अगर आपत्ति थी तो संसद में क्यों नहीं रोका, और अब लागू व्यवस्था का पालन करने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस को क्यों घेरा जा रहा है?**
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