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Jammu जम्मू: जम्मू शहर में एक बार फिर कूड़े के ढेर बनने का खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब जम्मू नगर निगम और सफाई कर्मचारियों के बीच आर-पार की जंग शुरू हो गई। विवाद का केंद्र गांधीनगर (जोन-3) की सफाई व्यवस्था को प्राइवेट ठेके पर सौंपने का निर्णय है, जिसे कर्मचारियों ने अपनी आजीविका पर सीधा हमला करार दिया है।
म्यूनिसिपल वर्कर्स यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर नगर निगम ने अपनी एनजीओ प्रथा को तत्काल नहीं रोका, तो 9 जून से पूरे जम्मू शहर में सफाई कर्मचारियों की पूर्ण हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। यूनियन के नेता का कहना है कि यह हड़ताल सिर्फ़ नाराजगी दिखाने के लिए नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य और जीवन यापन के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
नगर निगम ने गांधीनगर के 26 वार्डों की सफाई व्यवस्था को प्राइवेट एजेंसी के हवाले करने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। यह टेंडर 15 और 16 जून को खुलेंगे। निगम के अनुसार, इसका उद्देश्य सफाई की गुणवत्ता सुधारना और शहर के स्वच्छता मानकों को बनाए रखना है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से शहर की सफाई में लगे हुए हैं और प्राइवेट ठेके के कारण उन्हें बेरोज़गारी का सामना करना पड़ सकता है। यूनियन का दावा है कि निगम की यह योजना कर्मचारियों की मेहनत और सुरक्षा के अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर निगम ने इस योजना को लागू किया, तो गांधीनगर और अन्य इलाकों में कचरा जमा होने लगेगा और शहर में स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा होंगे।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कदम शहर की स्वच्छता सुनिश्चित करने और कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि प्राइवेट एजेंसियों के चयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता को ध्यान में रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निगम और कर्मचारियों के बीच यह टकराव जल्दी हल होना चाहिए। यदि हड़ताल होती है, तो जम्मू शहर के नागरिकों को कई दिनों तक कचरे के ढेर और बदबू जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
नगर निगम और यूनियन के बीच बातचीत अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि निगम अपने प्रस्ताव को लागू करने पर दृढ़ है। शहरवासियों की चिंता है कि यदि टकराव बढ़ा, तो गर्मी और मानसून के मौसम में सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता पर गंभीर असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि दोनों पक्षों को तुरंत बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए, ताकि शहर में कचरा प्रबंधन में बाधा न आए और नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।





