- Home
- /
- राज्य
- /
- जम्मू और कश्मीर
- /
- कठुआ फायरिंग में CISF...
कठुआ फायरिंग में CISF सहायक कमांडेंट अंकित पांडेय की मौत, अंबेडकरनगर में शोक

अंबेडकरनगर। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुई फायरिंग की घटना में जान गंवाने वालों में अंबेडकरनगर निवासी CISF के सहायक कमांडेंट अंकित पांडेय भी शामिल हैं। वह कठुआ में एक जल विद्युत परियोजना की सुरक्षा में तैनात थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही गांव और परिवार में शोक का माहौल बन गया। परिजन शव लेने के लिए जम्मू-कश्मीर रवाना हो गए, जिसके कारण बुधवार को घर पर सन्नाटा पसरा रहा।
अंकित पांडेय मूल रूप से इब्राहिमपुर क्षेत्र के दौलतपुर एकसरा के मठिया गांव के रहने वाले थे। परिवार और गांव के लोगों के अनुसार अंकित पढ़ाई के समय से ही अनुशासित और मेहनती थे। सरकारी सेवा में चयन के बाद उन्होंने लगातार आगे बढ़ते हुए अपनी जिम्मेदारियों को निभाया।
अंकित पांडेय की नियुक्ति वर्ष 2016 में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF में दारोगा के पद पर हुई थी। सेवा के दौरान अपने प्रदर्शन और योग्यता के आधार पर उन्होंने विभाग में आगे बढ़ने की तैयारी जारी रखी।
करीब दो साल पहले उनका चयन CISF में सहायक कमांडेंट के पद पर हो गया था। पदोन्नति के बाद उन्हें महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारियां दी गईं। वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के कठुआ क्षेत्र में एक हाइड्रो पावर प्लांट की सुरक्षा में थी।
कठुआ में हुई फायरिंग की घटना की सूचना जब उनके परिवार तक पहुंची तो घर में कोहराम मच गया। कुछ समय तक परिजन घटना की पूरी जानकारी जुटाते रहे, लेकिन बाद में अंकित की मौत की पुष्टि होने के बाद परिवार के सदस्य जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हो गए।
गांव में भी जैसे ही खबर फैली, बड़ी संख्या में परिचित और रिश्तेदार उनके घर पहुंचने लगे। हालांकि परिवार के प्रमुख सदस्य शव लेने के लिए निकल चुके थे, जिसके कारण घर पर गहरा सन्नाटा दिखाई दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंकित ने अपनी मेहनत से परिवार और गांव का नाम रोशन किया था। दारोगा पद से शुरुआत कर सहायक कमांडेंट बनने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा माना जाता था।
उनकी मौत की खबर से गांव के लोग स्तब्ध हैं। लोग परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधा रहे हैं और पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
अंकित की तैनाती जिस जल विद्युत परियोजना की सुरक्षा में थी, वहां CISF के जवान संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों में प्रवेश, सुरक्षा निगरानी और आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए बल के अधिकारियों और जवानों को विशेष जिम्मेदारी दी जाती है।
घटना के संबंध में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आनी बाकी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार जवान द्वारा की गई फायरिंग में अंकित पांडेय की जान गई। घटना किन परिस्थितियों में हुई और गोलीबारी की शुरुआत कैसे हुई, इसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
फायरिंग में अन्य लोगों के भी हताहत होने की सूचना है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही हैं और मौके पर मौजूद लोगों के बयान लिए जा सकते हैं।
परिवार के सदस्यों के मुताबिक अंकित अपनी नौकरी और जिम्मेदारियों को लेकर बेहद गंभीर रहते थे। छुट्टी मिलने पर वह गांव आते और परिवार के साथ समय बिताते थे।
उनकी सफलता से परिवार में हमेशा खुशी का माहौल रहता था। सहायक कमांडेंट बनने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने गर्व महसूस किया था। अब अचानक हुई घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
गांव के लोगों का कहना है कि अंकित का व्यवहार सभी के साथ अच्छा था। नौकरी में उच्च पद पर पहुंचने के बावजूद वह गांव के लोगों से जुड़े रहे।
उनकी मौत की सूचना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी जानकारी दी गई है। पार्थिव शरीर गांव पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की जाएगी।
परिवार के लोग फिलहाल जम्मू-कश्मीर में आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर रहे हैं। पोस्टमॉर्टम और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को अंबेडकरनगर लाया जाएगा।
CISF की ओर से भी अपने अधिकारी की मौत से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सेवा के दौरान जान गंवाने वाले अधिकारियों के मामले में विभाग की ओर से परिवार को नियमानुसार सहायता और अन्य लाभ दिए जाते हैं।
घटना की खबर मिलने के बाद गांव में बुधवार को सामान्य चहल-पहल के बीच भी शोक का माहौल रहा। अंकित के घर आने वाले लोग घटना के बारे में जानकारी लेते रहे।
परिजन और ग्रामीण अब यह जानना चाहते हैं कि फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई और आखिर ऐसा क्या हुआ कि सुरक्षा में तैनात अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी।
जांच पूरी होने के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
अंकित पांडेय का CISF में लगभग एक दशक का सफर रहा। वर्ष 2016 में दारोगा के पद से शुरू हुई उनकी सेवा सहायक कमांडेंट तक पहुंची थी। उन्होंने अपेक्षाकृत कम समय में विभाग में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया।
उनके गांव के कई युवाओं ने भी उनसे प्रेरणा लेकर सुरक्षा बलों और सरकारी सेवाओं की तैयारी शुरू की थी। इसी कारण उनकी मौत की खबर ने केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र को दुखी किया है।
फिलहाल परिजन पार्थिव शरीर लेकर लौटने की प्रक्रिया में हैं। गांव में उनके अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तैयारियों को लेकर भी लोग इंतजार कर रहे हैं।
कठुआ की इस घटना ने अंबेडकरनगर के दौलतपुर एकसरा गांव को गहरे शोक में डाल दिया है। सहायक कमांडेंट अंकित पांडेय की मौत से परिवार ने अपना सदस्य खोया है, जबकि गांव ने एक ऐसे युवा अधिकारी को खो दिया जिसने मेहनत और लगन से CISF में सहायक कमांडेंट तक का सफर तय किया था।





