जम्मू और कश्मीर

धर्म और भक्ति के रंग में रंगा Guru Nabha Das का उत्सव

Ratna Netam
9 April 2026 3:59 PM IST
धर्म और भक्ति के रंग में रंगा Guru Nabha Das का उत्सव
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JAMMU.जम्मू: गुरुद्वारों और श्रद्धालुओं में विशेष भक्ति और उल्लास के साथ गुरु नाभा दास जी का प्रकाश उत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व उनके जीवन, शिक्षाओं और धार्मिक योगदान को याद करने का अवसर था। पूरे शहर में उत्सव का माहौल देखने को मिला और श्रद्धालुओं ने मंदिरों और गुरुद्वारों को फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और सजावट से सजाया।
इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। सुबह से ही गुरुद्वारों में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारों में कीर्तन, भजन और प्रार्थनाओं में हिस्सा लिया। विशेष लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों को सामूहिक रूप से प्रसाद वितरित किया गया।
गुरु नाभा दास जी के जीवन और उनके शिक्षाओं को याद करते हुए धार्मिक वक्ताओं और पंडितों ने भजन कीर्तन के माध्यम से उनका संदेश लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने समाज में समानता, मानवता और भक्ति के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर विशेष आयोजनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाट्य प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिसमें गुरु नाभा दास के जीवन पर आधारित नाट्य और भजन प्रस्तुत किए गए।
स्थानीय प्रशासन ने उत्सव के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की। प्रमुख मार्गों और गुरुद्वारों पर पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों की ड्यूटी तैनात की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इस वर्ष भी कोरोना प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आयोजनों का संचालन किया गया।
भक्तों ने बताया कि गुरु नाभा दास का प्रकाश उत्सव उनके जीवन में शांति और आध्यात्मिक संतुलन लाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि यह पर्व भक्ति और समर्पण का प्रतीक है और समाज में भाईचारे और मानवता का संदेश फैलाता है।
विशेष रूप से, बच्चों और युवाओं ने भी उत्सव में सक्रिय भागीदारी दिखाई। उन्होंने कीर्तन, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लेकर उत्सव को और जीवंत बनाया। गुरु नाभा दास जी की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया और स्थानीय चैनलों पर लाइव प्रसारण भी किया गया।
अंततः, गुरु नाभा दास का यह प्रकाश उत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि समाज में एकता, भक्ति और सामूहिक चेतना को भी प्रोत्साहित करने वाला अवसर बना। इस धूमधाम ने शहरवासियों और श्रद्धालुओं के बीच भक्ति, उल्लास और सामूहिक प्रेम का संदेश फैलाया।
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