- Home
- /
- राज्य
- /
- जम्मू और कश्मीर
- /
- फायर NOC के बदले...
फायर NOC के बदले रिश्वत मांगने का आरोप, CBI ने उधमपुर में फायरमैन को गिरफ्तार किया

जम्मू। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के असिस्टेंट डायरेक्टर कार्यालय में तैनात एक फायरमैन को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कटरा स्थित एक होटल के लिए फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी NOC प्रक्रिया आगे बढ़ाने और उसे जारी कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
सीबीआई के अनुसार यह मामला एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने एजेंसी को बताया था कि आरोपी फायरमैन होटल की फायर NOC से जुड़ी प्रक्रिया के बदले उससे 40 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। आरोप है कि पैसे नहीं देने की स्थिति में काम में देरी या रुकावट आने का दबाव बनाया गया।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की प्रारंभिक जांच की। अधिकारियों ने आरोपों की पुष्टि के लिए शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुई बातचीत तथा उपलब्ध अन्य जानकारियों का सत्यापन किया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कथित तौर पर 40 हजार रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बातचीत के बाद आरोपी 15 हजार रुपये लेने पर सहमत हो गया।
इसके बाद सीबीआई ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। तय योजना के तहत शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम लेकर आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही आरोपी ने कथित तौर पर 15 हजार रुपये स्वीकार किए, मौके पर मौजूद सीबीआई टीम ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद रिश्वत की रकम बरामद कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
गिरफ्तार आरोपी उधमपुर में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के असिस्टेंट डायरेक्टर कार्यालय में फायरमैन के पद पर तैनात बताया गया है। हालांकि शिकायत कटरा स्थित होटल की NOC से जुड़ी थी। अब सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की इस प्रक्रिया में वास्तविक भूमिका क्या थी और वह किस आधार पर NOC जारी कराने या प्रक्रिया को प्रभावित करने का दावा कर रहा था।
जांच एजेंसी इस पहलू की भी पड़ताल कर सकती है कि कहीं इस मामले में विभाग के अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल तो नहीं थे। आरोपी से पूछताछ के जरिए यह जानने की कोशिश की जाएगी कि कथित रिश्वत की रकम केवल उसके लिए थी या इसमें अन्य लोगों की भी हिस्सेदारी तय की गई थी।
फायर NOC किसी होटल, व्यावसायिक भवन या अन्य प्रतिष्ठान के संचालन के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसमें अग्नि सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जांच की जाती है। आपात स्थिति में आग से बचाव के उपकरण, निकासी मार्ग, अग्निशमन व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों का परीक्षण करने के बाद ही संबंधित विभाग प्रमाणपत्र जारी करता है।
ऐसे में इस प्रक्रिया में रिश्वतखोरी का आरोप गंभीर माना जाता है। यदि सुरक्षा जांच के बजाय रिश्वत के आधार पर NOC जारी की जाए तो इससे आम लोगों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर ट्रैप कार्रवाई करती हैं।
सीबीआई अब आरोपी के कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। कटरा के संबंधित होटल की NOC फाइल कब जमा हुई, उस पर किन अधिकारियों या कर्मचारियों ने कार्रवाई की और प्रक्रिया किस चरण में थी, इन सभी तथ्यों का मिलान किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी का दावा कितना प्रभावी था और वह वास्तव में फाइल पर किस स्तर तक असर डाल सकता था।
जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की भी जांच होने की संभावना है। कॉल रिकॉर्ड, संदेश और शिकायतकर्ता के साथ हुई बातचीत से मामले में अतिरिक्त साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं। यदि किसी अन्य व्यक्ति के साथ रिश्वत की रकम या NOC प्रक्रिया को लेकर बातचीत सामने आती है तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।
सीबीआई भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने के बाद पहले आरोपों का सत्यापन करती है और पर्याप्त आधार मिलने पर मामला दर्ज कर ट्रैप कार्रवाई करती है। इस मामले में भी शिकायत के बाद कथित मांग की पुष्टि होने पर कार्रवाई की गई और आरोपी को रिश्वत स्वीकार करते हुए पकड़ने का दावा किया गया है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित अदालत में पेश किया जा सकता है। जांच एजेंसी पूछताछ के लिए उसकी हिरासत की मांग कर सकती है। अदालत से मिलने वाले आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामले में यह भी जांच का विषय रहेगा कि शिकायतकर्ता से शुरुआत में 40 हजार रुपये की मांग क्यों की गई और बाद में रकम घटाकर 15 हजार रुपये कैसे तय हुई। सीबीआई इस पूरी बातचीत की कड़ियां जोड़कर कथित रिश्वत मांगने की परिस्थितियों को स्पष्ट करने का प्रयास करेगी।
कटरा जम्मू-कश्मीर का प्रमुख पर्यटन और तीर्थ क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं। ऐसे में फायर सेफ्टी NOC से जुड़ी प्रक्रिया का पारदर्शी और नियमों के अनुसार होना बेहद जरूरी है। इस तरह के मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आने पर विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
फिलहाल सीबीआई ने आरोपी फायरमैन को गिरफ्तार कर लिया है और रिश्वतखोरी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। आगे की पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद यह साफ हो सकेगा कि यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित था या इसके पीछे अन्य लोगों की भी भूमिका थी।





