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J&K : जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य क्षेत्र में शनिवार को एक बड़ा मामला सामने आया, जहां अनंतनाग गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) में बड़े पैमाने पर प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियों के आरोपों के बाद एक वरिष्ठ डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जांच में यह खुलासा हुआ है कि जिन मरीजों की एडवांस्ड कार्डियक सर्जरी की गई थी, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत को उस सर्जरी की आवश्यकता ही नहीं थी।
यह मामला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अनंतनाग में सामने आए कथित पेसमेकर इम्प्लांटेशन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कुल 103 कार्डियक मरीजों के इलाज की समीक्षा की गई। विशेषज्ञ जांच में पाया गया कि 55 मरीजों में से 27 मरीजों का हार्ट फंक्शन सामान्य था और उनके मामले में पेसमेकर लगाने या जटिल कार्डियक सर्जरी करने का कोई चिकित्सकीय आधार नहीं था।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में मरीजों के साथ कथित रूप से शोषण किया गया और इंश्योरेंस क्लेम में हेरफेर कर वित्तीय लाभ उठाने की कोशिश की गई। इसके अलावा आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियों और छेड़छाड़ के संकेत पाए गए हैं, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
इस पूरे प्रकरण में जिन डॉक्टर पर कार्रवाई की गई है, उनकी पहचान कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सैयद मकबूल अहमद शाह के रूप में की गई है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं और मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप सामने आए हैं।
जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस मामले की विस्तृत जांच के बाद कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किया है। विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई कमिश्नर/सेक्रेटरी एम. राजू द्वारा जारी आदेश के तहत की गई है।
फिलहाल पूरे मामले ने चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि कुछ मरीजों को बिना पर्याप्त चिकित्सकीय आवश्यकता के उच्च स्तरीय कार्डियक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा, जिससे न केवल स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न हुए बल्कि सरकारी और बीमा प्रणाली के दुरुपयोग की भी आशंका बनी है।
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अन्य मामलों की भी समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी इसी तरह की अनियमितताएं तो नहीं हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले ने चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जा





