जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में कौशल विकास को बढ़ावा, आईटीआई के लिए 475 करोड़ की मंजूरी

Kiran
17 Oct 2026 8:32 AM IST
जम्मू-कश्मीर में कौशल विकास को बढ़ावा, आईटीआई के लिए 475 करोड़ की मंजूरी
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Srinagar श्रीनगर, केंद्र सरकार ने PM-SETU योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में दो औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) क्लस्टरों को अपग्रेड करने के लिए 475.41 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। व्यावसायिक प्रशिक्षण के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए निजी कंपनियां इसमें भागीदार बनेंगी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 'प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs' (PM-SETU) की राष्ट्रीय संचालन समिति ने शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई अपनी बैठक में जम्मू ITI क्लस्टर के लिए 240 करोड़ रुपये और श्रीनगर क्लस्टर के लिए 235.41 करोड़ रुपये मंजूर किए।
बयान में कहा गया है कि जम्मू क्लस्टर को अपग्रेड करने में 'ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड' भागीदार होगी, जबकि श्रीनगर क्लस्टर के लिए 'इंदरदीप इंफ्रा इंडिया लिमिटेड' को चुना गया है। श्रीनगर क्लस्टर में 'गवर्नमेंट ITI श्रीनगर' मुख्य केंद्र (हब) है, और गांदरबल, कंगन, बडगाम तथा चरार-ए-शरीफ के ITI इससे जुड़े संस्थान हैं। जम्मू क्लस्टर में 'गवर्नमेंट ITI जम्मू' मुख्य केंद्र है, और आर.एस. पुरा, नौशेरा, सांबा तथा कठुआ के ITI इससे जुड़े संस्थान हैं। मंजूर की गई योजनाओं में बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप नए कोर्स शुरू करना, प्रशिक्षण सुविधाओं में सुधार और प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाना शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण लेने वालों के लिए रोजगार के अवसरों को बेहतर बनाना है।
ये मंजूरियां उन पांच ITI क्लस्टर परियोजनाओं का हिस्सा हैं, जिनके लिए बैठक में कुल 1,194.92 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। बाकी तीन क्लस्टर महाराष्ट्र और ओडिशा में हैं। बयान के अनुसार, इन नई मंजूरियों के साथ PM-SETU के तहत स्वीकृत कुल निवेश 3,687 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। समिति ने योजना के तहत प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण (इंस्ट्रक्टर-ट्रेनिंग) वाले हिस्से की भी समीक्षा की। बयान के मुताबिक, अक्टूबर 2026 तक 'नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स' के माध्यम से 3,744 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका था। PM-SETU योजना का लक्ष्य सरकार और उद्योग जगत की भागीदारी के जरिए ITI को अपग्रेड करना है। हाल ही में मंजूर की गई इन परियोजनाओं का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें किस तरह लागू किया जाता है, प्रशिक्षण की गुणवत्ता कैसी रहती है, और ये कोर्स नियोक्ताओं (एम्प्लॉयर्स) की जरूरतों को किस हद तक पूरा करते हैं।
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