जम्मू और कश्मीर

आईएएस अधिकारी के आचरण पर बीजेपी नाराज, जताई कड़ी आपत्ति

Kiran
17 Oct 2026 8:23 AM IST
आईएएस अधिकारी के आचरण पर बीजेपी नाराज, जताई कड़ी आपत्ति
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Srinagar/Jammu श्रीनगर/जम्मू, जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने शुक्रवार को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन द्वारा एक महिला अधिकारी के प्रति कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने की निंदा की। पार्टी ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में नौकरशाहों को 2019 के बाद की कार्य-संस्कृति अपनानी चाहिए और पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। बुधवार को एक समीक्षा बैठक के दौरान, रंजन ने जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) की अधिकारी बीनीश वानी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें नौकरी से निकालने की सिफारिश करने की धमकी दी, जिससे विवाद खड़ा हो गया। बाद में, इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया।
बीजेपी के जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने यहां पत्रकारों से कहा, "भारतीय जनता पार्टी इसकी कड़ी निंदा और विरोध करती है। ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। अपने से कनिष्ठ अधिकारियों के प्रति असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करना निंदनीय है। जिस तरह से आईएएस अधिकारी ने एक जेकेएएस (JKAS) अधिकारी से बदतमीजी से बात की और असंसदीय शब्दों का प्रयोग किया, ऐसा कभी नहीं होना चाहिए। हम इसकी निंदा करते हैं।"
उन्होंने कहा, "यह नया जम्मू-कश्मीर है, जो 2019 के बाद बदल गया है। इस बदले हुए जम्मू-कश्मीर में, आपको 2019 के बाद की कार्य-संस्कृति अपनानी होगी। यह अब वह जम्मू-कश्मीर नहीं है जहां हड़तालें होती थीं, या जहां लोग स्टाफ या कंप्यूटर की कमी का बहाना बनाते थे। भारत सरकार ने सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।" ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर रही है, ताकि जम्मू-कश्मीर के युवा अपने पैरों पर खड़े हो सकें। उन्होंने कहा, "इतनी महत्वपूर्ण योजनाओं को हल्के में लेना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे आप आईएएस अधिकारी हों या जेकेएएस अधिकारी, सभी को जवाबदेह ठहराया जाएगा और पाई-पाई का हिसाब देना होगा।"
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि सरकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर "उतनी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है, जितना किया जाना चाहिए था, जिसका मतलब है कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।" “आपको अपनी कार्य-संस्कृति (work culture) बदलनी होगी। इसे चेतावनी मानें, सलाह मानें, या जो भी आप चाहें। यह नया भारत है, नया जम्मू-कश्मीर है। इस नए दौर में, हर अधिकारी को जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए; तभी जम्मू-कश्मीर आगे बढ़ पाएगा और इन योजनाओं से जुड़े सैकड़ों युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा,” उन्होंने आगे कहा।
वरिष्ठ भाजपा नेता और जम्मू के पूर्व मेयर राजिंदर शर्मा ने IAS अधिकारी के कथित दुर्व्यवहार को “लोकतंत्र पर एक कलंक” बताया और अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
शर्मा ने राजनीतिक नेतृत्व को इस बात के लिए जिम्मेदार ठहराया कि वे अधिकारियों को जवाबदेह और उत्तरदायी बनाने में “विफल” रहे हैं। शर्मा ने यहां पत्रकारों से कहा, “यह घटना हमारे लोकतंत्र पर एक बड़ा धब्बा है। कर्मचारियों और आम जनता के साथ जिस तरह का बर्ताव किया जाता है, और जिस तरह से यह सिस्टम काम करता है, वह दिखाता है कि हमारा लोकतंत्र किस दिशा में जा रहा है।”
उन्होंने सवाल किया, “अगर एक IAS अधिकारी ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है, तो एक आम इंसान से किस तरह की भाषा की उम्मीद की जा सकती है?” शर्मा ने आरोप लगाया कि यह घटना जम्मू-कश्मीर की नौकरशाही (bureaucracy) में मौजूद एक बड़ी समस्या को दर्शाती है। यहां कुछ अधिकारी लोगों के प्रति अहंकारी रवैया अपना लेते हैं—खासकर उन लोगों के प्रति जिन्हें वे सीधा-सादा और विरोध न करने वाला समझते हैं—और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि राजनीतिक व्यवस्था में उन्हें रोकने-टोकने की कमी है। उन्होंने IAS अधिकारी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए।
शर्मा ने पूछा, “क्या सब कुछ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को ही करना होगा? क्या मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सिर्फ एक ट्वीट करके खत्म हो गई? वे अपने पूरे मंत्रिमंडल को लेकर उपराज्यपाल के पास क्यों नहीं जा सकते और उन्हें यह क्यों नहीं बता सकते कि ऐसी घटना हुई है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से संपर्क करना चाहिए—जिनके विभाग के अंतर्गत IAS अधिकारी आते हैं—ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटना दोबारा न हो और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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