जम्मू और कश्मीर

दक्षिण कश्मीर में तिरंगा रैली पर BJP की बड़ी कार्रवाई, नौ नेताओं की सदस्यता निलंबित

Kavita2
8 Aug 2026 9:52 AM IST
दक्षिण कश्मीर में तिरंगा रैली पर BJP की बड़ी कार्रवाई, नौ नेताओं की सदस्यता निलंबित
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई ने दक्षिण कश्मीर में आयोजित एक विवादित तिरंगा रैली को लेकर बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की है। पार्टी ने नौ नेताओं और पदाधिकारियों की प्राथमिक सदस्यता निलंबित कर दी है और उन्हें उनके संगठनात्मक पदों से भी हटा दिया है। इन नेताओं पर पार्टी की अनुमति के बिना रैली आयोजित करने और उसमें शामिल होने का आरोप है। रैली के दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक और आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के बाद विवाद गहरा गया था।

पार्टी की कार्रवाई के बाद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रैली में कथित आपत्तिजनक नारों की आलोचना की थी। इसके बाद BJP ने विवादित टिप्पणियों से खुद को अलग करते हुए संबंधित नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की।

बिना अनुमति आयोजित हुई थी रैली

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवादित कार्यक्रम 5 अगस्त को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के खानाबल स्थित हाउसिंग कॉलोनी में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का आयोजन अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण की सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया था। इस दौरान कुछ BJP कार्यकर्ताओं और नेताओं की ओर से ऐसे नारे लगाए गए, जिन पर महिलाओं के प्रति अपमानजनक होने का आरोप लगा।

रैली के वीडियो और कथित नारों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया तेज हुई। राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने इन नारों को लेकर आपत्ति जताई और BJP से कार्रवाई की मांग की। विवाद बढ़ने के बाद पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि कुछ व्यक्तियों की ओर से की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां पार्टी की विचारधारा या आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।

नौ नेताओं पर संगठनात्मक कार्रवाई

विवाद के बाद BJP की अनंतनाग जिला इकाई ने नौ नेताओं की प्राथमिक सदस्यता निलंबित करने का फैसला लिया। इन नेताओं को उनके मौजूदा संगठनात्मक पदों से भी हटा दिया गया है। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता के मामले के रूप में देखा है।

पार्टी की ओर से जारी कार्रवाई का संदेश साफ है कि संगठन की अनुमति के बिना कार्यक्रम आयोजित करना और ऐसे कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों की भागीदारी स्वीकार नहीं की जाएगी, खासकर तब जब कार्यक्रम के दौरान ऐसी भाषा का इस्तेमाल हो जिससे पार्टी की छवि प्रभावित होती हो।

इस कार्रवाई के जरिए BJP ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी सार्वजनिक कार्यक्रमों में अनुशासन और मर्यादा को लेकर गंभीर है। साथ ही, विवादित नारों से पार्टी को राजनीतिक रूप से जोड़ने की कोशिशों से भी दूरी बनाने का प्रयास किया गया है।

महिलाओं के खिलाफ नारों से बढ़ा विवाद

पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू रैली के दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक नारों को माना जा रहा है। इन नारों के सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर की कई राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), आम आदमी पार्टी (AAP) और नागरिक समाज से जुड़े कई समूहों ने कथित टिप्पणियों की आलोचना की और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

विरोध करने वालों का कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस विवाद ने रैली के मूल राजनीतिक उद्देश्य से ज्यादा उसमें लगाए गए कथित नारों को चर्चा का केंद्र बना दिया।

अनुच्छेद 370 की वर्षगांठ पर कार्यक्रम

5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दलों ने अनुच्छेद 370 से जुड़े अपने-अपने रुख के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए। जहां NC, PDP और कांग्रेस सहित कुछ दलों ने इस दिन को ‘ब्लैक डे’ के तौर पर मनाते हुए विरोध प्रदर्शन किए, वहीं BJP ने अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को लेकर कार्यक्रम किए।

इसी क्रम में दक्षिण कश्मीर में BJP से जुड़े कार्यकर्ताओं की ओर से तिरंगा रैली निकाली गई थी। पार्टी के लिए यह आयोजन राष्ट्रवाद और अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के समर्थन से जुड़ा था, लेकिन कथित आपत्तिजनक नारों के कारण कार्यक्रम विवाद में आ गया।

पार्टी ने विवादित बयान से बनाई दूरी

विवाद सामने आने के बाद BJP ने स्पष्ट किया कि कुछ लोगों की ओर से की गई टिप्पणियां पार्टी की आधिकारिक नीति या विचारधारा को नहीं दर्शाती हैं। इसके बाद संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

पार्टी की ओर से नेताओं की सदस्यता निलंबित करने और पदों से हटाने का कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि BJP इस विवाद को व्यक्तिगत स्तर की अनुशासनहीनता के रूप में देखना चाहती है। इससे पार्टी की आधिकारिक छवि को कथित आपत्तिजनक नारों से अलग रखने की कोशिश भी दिखाई देती है।

राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का मुद्दा अब भी बेहद संवेदनशील राजनीतिक विषय है। ऐसे में उससे जुड़े कार्यक्रमों में होने वाली कोई भी घटना तेजी से राजनीतिक विवाद का रूप ले सकती है। इस मामले में भी तिरंगा रैली के दौरान कथित नारों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

BJP की ओर से की गई कार्रवाई के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी आगे इस मामले में कोई और अनुशासनात्मक कदम उठाती है या नहीं। साथ ही, कथित नारों को लेकर प्रशासनिक या कानूनी स्तर पर कोई कार्रवाई होती है तो उसका भी असर राजनीतिक माहौल पर पड़ सकता है।

संगठन के लिए अनुशासन का संदेश

नौ नेताओं को एक साथ संगठनात्मक पदों से हटाने और उनकी प्राथमिक सदस्यता निलंबित करने का फैसला जम्मू-कश्मीर BJP के भीतर अनुशासन को लेकर कड़ा संदेश माना जा रहा है। पार्टी के लिए यह जरूरी है कि उसके सार्वजनिक कार्यक्रम निर्धारित नियमों और संगठनात्मक निर्देशों के अनुसार ही आयोजित हों।

दक्षिण कश्मीर की इस घटना ने यह भी दिखाया है कि संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर आयोजित कार्यक्रमों में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बयानों का असर कितना व्यापक हो सकता है। BJP की ताजा कार्रवाई से फिलहाल पार्टी ने विवादित नारों से अपनी दूरी स्पष्ट करने की कोशिश की है।

अब इस मामले में आगे की संगठनात्मक और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल नौ नेताओं की सदस्यता निलंबित किए जाने और पदों से हटाए जाने के बाद यह साफ है कि BJP ने रैली के दौरान कथित आपत्तिजनक नारों के विवाद को गंभीरता से लिया है और संगठनात्मक अनुशासन के स्तर पर कड़ा कदम उठाया है।

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