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जम्मू और कश्मीर
कुलचे से आगे बर्गर-सैंडविच में कलाड़ी, पारंपरिक स्वाद को मिलेगा नया रूप
nidhi
16 Oct 2026 7:48 AM IST

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व्यावसायिक परीक्षण होंगे अहम
ऊधमपुर: जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक कलाड़ी को स्थानीय बाजारों से बाहर बड़े खाद्य कारोबार तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास आगे बढ़ रहे हैं। अपने विशिष्ट स्वाद और बनावट के लिए प्रसिद्ध इस दुग्ध उत्पाद के संरक्षण तथा प्रसंस्करण पर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। उद्देश्य है कि कलाड़ी को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके और उससे बर्गर, कटलेट, हॉटडॉग तथा सैंडविच जैसे उत्पाद विकसित हों। पिज्जा में भी इसके इस्तेमाल की संभावना देखी जा रही है।
कलाड़ी की सीमित भंडारण अवधि लंबे समय से कारोबार के विस्तार की चुनौती रही है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी इस विषय पर वैज्ञानिक संस्थानों से काम करने को कहा था। जनवरी 2026 में उन्होंने वैज्ञानिक परीक्षण, उचित पैकेजिंग और प्रसंस्करण के जरिए इसकी भंडारण अवधि बढ़ाने की आवश्यकता बताई थी। साथ ही, मूल स्वाद और विशेषताओं को बनाए रखते हुए बाजार तथा निर्यात की संभावनाएं विकसित करने पर जोर दिया गया था।
ताजा विवरण में निर्धारित प्रशीतित परिस्थितियों में कलाड़ी की शेल्फ लाइफ करीब 26 दिन तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। कुछ विवरणों में यह अवधि 26 से 28 दिन बताई गई है। इसलिए इसे हर तरह की कलाड़ी के सामान्य तापमान पर निश्चित रूप से 27 दिन ताजा रहने का दावा नहीं समझना चाहिए। अवधि संबंधित उत्पादन प्रक्रिया, पैकेजिंग और भंडारण की शर्तों से जुड़ी है।
इस पहल में मैसूरु स्थित सीएसआईआर के केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान की भूमिका है। संस्थान की खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कलाड़ी को व्यापक बाजार के अनुकूल बनाने के लिए किया जा रहा है। सरकार की ओर से इसे ऊधमपुर के जीआई पहचान वाले उत्पाद और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल से जुड़े अवसर के रूप में भी देखा गया है। कलाड़ी दूध से तैयार गोल और चपटी टिकिया जैसा पारंपरिक उत्पाद है। इसे तवे पर सेंककर खाया जाता है। पकने पर इसकी बाहरी सतह सुनहरी होती है और अंदर का हिस्सा मुलायम रहता है। ऊधमपुर और आसपास के क्षेत्रों में कलाड़ी-कुलचा लोकप्रिय है। अब इसी स्थानीय स्वाद को नए व्यंजनों और बड़े बाजारों से जोड़ने की कोशिश हो रही है।
मोजरेला से इसकी तुलना मुख्य रूप से आधुनिक व्यंजनों में संभावित उपयोग के संदर्भ में है। पिज्जा या बर्गर में चीज का चयन स्वाद के अलावा गर्म होने पर उसके व्यवहार पर भी निर्भर करता है। कलाड़ी किस तरह पिघलती है, उसकी बनावट कैसी रहती है और तैयार व्यंजन में उसका प्रदर्शन कैसा होता है, इन पहलुओं के परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे। अभी बड़े स्तर पर मोजरेला की जगह लेने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लंबे समय तक सुरक्षित रखे जा सकने वाले मानकीकृत उत्पाद से स्थानीय निर्माताओं, दूध उत्पादकों और छोटे कारोबारियों को नए खरीदार मिलने की संभावना है। हालांकि, नियमित व्यावसायिक आपूर्ति के लिए उत्पादन की एकरूपता, खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग और शीत भंडारण की व्यवस्था जरूरी होगी। तकनीक का उद्देश्य पारंपरिक खाद्य पहचान को बनाए रखते हुए उसके उपयोग और बाजार का विस्तार करना है।
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