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वक्फ धार्मिक स्थलों पर कबूतरों को दाना खिलाने और तहरी बांटने पर रोक

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने अपने अधीन आने वाले धार्मिक स्थलों में पक्षियों को दाना खिलाने और श्रद्धालुओं के बीच तहरी या अन्य खाद्य सामग्री बांटने पर रोक लगा दी है। बोर्ड ने धार्मिक परिसरों में साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखने का हवाला देते हुए श्रद्धालुओं तथा वहां आने वाले लोगों को नए निर्देशों का पालन करने को कहा है। कबूतरों को दाना खिलाना और तहरी वितरित करना लंबे समय से घाटी के कई पवित्र स्थलों की यात्रा से जुड़ी परंपराओं का हिस्सा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी की नेता दरख्शां अंद्राबी की अध्यक्षता वाले जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने निर्देश दिया है कि वक्फ द्वारा प्रबंधित धार्मिक स्थलों के परिसर में कोई भी व्यक्ति कबूतरों अथवा अन्य पक्षियों के लिए दाना न डाले। इसके साथ ही परिसर के भीतर तहरी, चावल या अन्य खाद्य सामग्री के वितरण की गतिविधि भी नहीं की जाएगी।
बोर्ड के अनुसार, धार्मिक स्थलों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पक्षियों के लिए जमीन पर डाला गया अनाज और लोगों के बीच वितरित भोजन का बचा हुआ हिस्सा परिसर में फैलने से साफ-सफाई प्रभावित होती है। खाद्य अवशेषों के कारण गंदगी होने और पक्षियों की संख्या बढ़ने जैसी स्थितियों को देखते हुए इन गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया गया है।
धार्मिक स्थलों पर कबूतरों को दाना खिलाने को कई श्रद्धालु पुण्य और सेवा से जोड़कर देखते हैं। इसी तरह तहरी या अन्य भोजन का वितरण भी दान और सामुदायिक सेवा की भावना से किया जाता रहा है। विशेष अवसरों, धार्मिक आयोजनों और मनोकामना पूरी होने पर लोग श्रद्धालुओं के बीच भोजन बांटते हैं। बोर्ड के नए निर्देश के बाद अब ऐसी गतिविधियों को धार्मिक परिसर से बाहर या प्रशासन द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार करना पड़ सकता है।
आदेश का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को समाप्त करना नहीं, बल्कि वक्फ स्थलों के भीतर भोजन और अनाज के अनियंत्रित वितरण को रोकना बताया गया है। बोर्ड का जोर है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा के साथ स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी आवश्यक है। बड़ी संख्या में लोगों के आने वाले परिसरों में नियमित सफाई के बावजूद खुले में भोजन और दाना डालने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कबूतरों और अन्य पक्षियों के एक स्थान पर बड़ी संख्या में जमा होने से उनके पंख, बीट और बचा हुआ अनाज परिसर में फैल सकता है। पत्थर, फर्श, दीवारों और अन्य संरचनाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा जमीन पर बिखरे भोजन से दूसरे जानवर भी परिसर की ओर आकर्षित हो सकते हैं। बोर्ड ने इन्हीं स्वच्छता संबंधी स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबंध लागू किया है।
खाना बांटने के दौरान धार्मिक स्थलों में भीड़ बढ़ने की स्थिति भी बनती है। वितरण के लिए लोग एक स्थान पर जमा होते हैं और कभी-कभी पत्तल, प्लास्टिक, पैकेट या बचा हुआ भोजन परिसर में छोड़ दिया जाता है। इससे सफाई कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। बोर्ड का मानना है कि धार्मिक स्थल पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।
नए आदेश को लागू कराने की जिम्मेदारी संबंधित धार्मिक स्थलों के प्रशासकों और कर्मचारियों पर रहेगी। उन्हें आने वाले श्रद्धालुओं को निर्देशों की जानकारी देनी होगी और परिसर में दाना या भोजन बांटने से रोकना होगा। प्रवेश स्थलों पर सूचना पट्ट लगाने या सार्वजनिक घोषणाओं के जरिए लोगों को जागरूक किया जा सकता है। हालांकि आदेश का उल्लंघन करने पर किसी प्रकार के जुर्माने या अन्य कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
बोर्ड के फैसले के बाद धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल भी उठ सकता है। कुछ श्रद्धालु इन गतिविधियों को अपनी आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में नए निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बोर्ड को लोगों के साथ संवाद करना पड़ सकता है। श्रद्धालुओं को यह समझाना आवश्यक होगा कि रोक का उद्देश्य धार्मिक भावना को प्रभावित करना नहीं, बल्कि परिसर में स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना है।
भोजन वितरण से जुड़ी परंपरा को पूरी तरह समाप्त किए बिना इसके लिए वैकल्पिक स्थान या नियंत्रित व्यवस्था तैयार करने की संभावना भी तलाशी जा सकती है। यदि परिसर के बाहर किसी निर्धारित स्थान पर भोजन बांटने की अनुमति दी जाए और सफाई का उत्तरदायित्व तय किया जाए तो धार्मिक सेवा तथा स्वच्छता दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। इसी तरह पक्षियों को दाना देने के लिए धार्मिक स्थल से दूर किसी निर्धारित स्थान की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
वक्फ बोर्ड जम्मू-कश्मीर में अपने अधीन आने वाली मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक संपत्तियों के प्रशासन तथा रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता है। इस कारण इन परिसरों में व्यवस्था, सफाई और सुविधाओं से संबंधित निर्देश जारी करना उसके प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है। नए आदेश का असर उन सभी धार्मिक स्थलों पर होगा, जो बोर्ड के प्रबंधन में आते हैं।
फिलहाल श्रद्धालुओं और आम लोगों से निर्देशों का पालन करने तथा धार्मिक परिसरों को साफ रखने की अपील की गई है। आदेश के बाद संबंधित स्थलों पर पारंपरिक भोजन वितरण और पक्षियों को दाना खिलाने की गतिविधियों को रोकने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसका व्यावहारिक प्रभाव आदेश के क्रियान्वयन और श्रद्धालुओं के सहयोग पर निर्भर करेगा।





