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जम्मू और कश्मीर
पहाड़ी भाषी बोर्ड में सुधार की दिशा में BADC ने दी सिफारिशें
Ratna Netam
2 May 2026 5:23 PM IST

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Jammu.जम्मू: राज्य में पहाड़ी भाषाओं के विकास और संरक्षण के लिए काम कर रहे पहाड़ी भाषी बोर्ड के कामकाज को लेकर BADC (बोर्ड आफ़ ऑल डेवेलपमेंट काउंसिल) ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। संगठन ने कहा कि बोर्ड की नीतियों, निधियों और परियोजनाओं की समीक्षा और निगरानी में पारदर्शिता बढ़ाना जरूरी है ताकि स्थानीय भाषाओं और संस्कृति का विकास समुचित रूप से हो सके।
BADC ने हाल ही में एक बयान जारी करते हुए कहा कि पहाड़ी भाषी बोर्ड के कई कार्य और योजनाएं आम जनता के लिए अस्पष्ट रहती हैं। संगठन का कहना है कि अगर बोर्ड के निर्णय, वित्तीय लेन-देन और परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक और नियमित रूप से साझा की जाए, तो इससे न केवल स्थानीय समुदाय का विश्वास बढ़ेगा बल्कि बोर्ड की प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।
BADC के अध्यक्ष ने बताया, "हम चाहते हैं कि पहाड़ी भाषी बोर्ड के कामकाज में अधिक पारदर्शिता हो। योजनाओं की योजना, कार्यान्वयन और फंड के इस्तेमाल की जानकारी समय-समय पर जनता के साथ साझा की जाए। इससे स्थानीय भाषाओं और संस्कृति को बचाने और बढ़ावा देने के प्रयासों में सुधार होगा।"
संगठन ने कहा कि पहाड़ी भाषाओं का संरक्षण केवल भाषा विशेषज्ञों या शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समुदाय और सरकार के साझा प्रयासों से ही यह संभव हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि बोर्ड की बैठकों, परियोजनाओं और वित्तीय रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए ताकि नागरिकों को यह पता चल सके कि उनके संसाधनों का उपयोग कैसे हो रहा है।
BADC ने यह भी उल्लेख किया कि पारदर्शिता न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाती है बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहित करती है। युवा और शोधकर्ता तब बेहतर ढंग से पहाड़ी भाषाओं, साहित्य और संस्कृति में योगदान दे सकते हैं जब उन्हें बोर्ड के कामकाज और अवसरों की स्पष्ट जानकारी मिले।
संगठन ने सरकार से आग्रह किया कि वह बोर्ड की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा करे और सुनिश्चित करे कि सभी परियोजनाओं और योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद समुदायों तक पहुंचे। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण और फीडबैक तंत्र को भी सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
BADC का कहना है कि अगर पहाड़ी भाषी बोर्ड में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है, तो इससे केवल भाषाओं और संस्कृति का संरक्षण ही नहीं होगा, बल्कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी और बोर्ड के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा। संगठन ने इस दिशा में सरकार और प्रशासन से सहयोग की उम्मीद जताई।
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