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अमरनाथ यात्रा में पशु सेवा, 10 हजार घोड़े-खच्चरों को रोज मिल रहा चारा

श्रीनगर : श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा की वार्षिक यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और मानवीय करुणा की भी मिसाल बनती जा रही है। कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर लाखों श्रद्धालुओं को बाबा बर्फानी के दर्शन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले घोड़े, खच्चर और अन्य भारवाही पशु भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन बेजुबान साथियों की देखभाल के लिए एक विशेष पहल शुरू की गई है, जिसके तहत प्रतिदिन करीब 10 हजार पशुओं को निशुल्क चारा, स्वच्छ पेयजल और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
‘पशु सेवा’ नाम से चलाई जा रही इस पहल का उद्देश्य अमरनाथ यात्रा में इस्तेमाल होने वाले पशुओं के स्वास्थ्य और देखभाल को सुनिश्चित करना है। यात्रा के दौरान ये पशु कठिन और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों पर श्रद्धालुओं और सामान को पहुंचाने का काम करते हैं। ऐसे में उनकी थकान, भोजन और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है।
दिल्ली की समाजसेवी संस्था श्री पशुपति नाथ सेवक पिछले तीन वर्षों से अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सेवा कार्य कर रही है। संस्था की ओर से पवित्र गुफा के आसपास श्रद्धालुओं, पोनी चालकों और यात्रा से जुड़े अन्य लोगों के लिए पारंपरिक 56 भोग लंगर संचालित किया जा रहा है। अब संस्था ने अपनी सेवा का दायरा बढ़ाते हुए पशुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था शुरू की है।
संस्था के सदस्यों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा में घोड़े और खच्चर केवल परिवहन का साधन नहीं हैं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाने वाले महत्वपूर्ण साथी हैं। इसलिए उनकी देखभाल करना भी सेवा का ही एक हिस्सा है।
‘पशु सेवा’ अभियान के तहत पशुओं को पौष्टिक चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा उनके लिए साफ पानी की व्यवस्था की गई है, ताकि लंबी और कठिन यात्रा के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। जरूरत पड़ने पर पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा और अन्य देखभाल की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
अमरनाथ यात्रा का मार्ग काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन, ठंडा मौसम और कठिन रास्तों के कारण इंसानों के साथ-साथ पशुओं को भी काफी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में समय पर भोजन और आराम की सुविधा मिलने से उनकी सेहत बेहतर बनी रहती है।
पशु सेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि यात्रा की सफलता में इन पशुओं का योगदान बहुत बड़ा है। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करने में सक्षम नहीं होते और ऐसे में घोड़े-खच्चर उन्हें कठिन रास्तों को पार करने में मदद करते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना सभी की जिम्मेदारी है।
संस्था द्वारा संचालित यह पहल श्रद्धालुओं और स्थानीय पोनी संचालकों के बीच भी सराही जा रही है। पोनी चालकों का कहना है कि यात्रा के दौरान पशुओं को पर्याप्त चारा और पानी मिलना उनके लिए बड़ी राहत है। इससे पशुओं की कार्यक्षमता बनी रहती है और वे बेहतर तरीके से सेवा दे पाते हैं।
अमरनाथ यात्रा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में घोड़े-खच्चरों का इस्तेमाल किया जाता है। प्रशासन भी समय-समय पर पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी करता है। इसके बावजूद सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से यात्रा व्यवस्था को और मजबूती मिलती है।
श्री पशुपति नाथ सेवक संस्था का कहना है कि उनकी कोशिश है कि यात्रा से जुड़े हर व्यक्ति और हर जीव को सेवा का लाभ मिले। संस्था का मानना है कि धार्मिक यात्रा का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों और बेजुबानों की सहायता करना भी है।
इस पहल ने अमरनाथ यात्रा को सेवा और संवेदनशीलता का नया आयाम दिया है। जहां एक ओर श्रद्धालु आस्था के साथ बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों बेजुबान पशुओं की देखभाल कर लोग करुणा और जिम्मेदारी का संदेश दे रहे हैं।
‘पशु सेवा’ अभियान यह दिखाता है कि धार्मिक यात्राएं केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं होतीं, बल्कि मानवता और जीवों के प्रति संवेदना का भी प्रतीक बन सकती हैं। अमरनाथ यात्रा में शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।





