जम्मू और कश्मीर

Amarnath Yatra 2026 शुरू: 3,880 मीटर ऊंचाई पर पवित्र गुफा के लिए पहला जत्था रवाना

Kavita2
3 July 2026 9:27 AM IST
Amarnath Yatra 2026 शुरू: 3,880 मीटर ऊंचाई पर पवित्र गुफा के लिए पहला जत्था रवाना
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Jammu जम्मू: दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए वार्षिक अमरनाथ यात्रा शुक्रवार (3 जुलाई) से शुरू हो गई है। यह गुफा समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव के प्रतीक के रूप में पूजते हैं। यात्रा शुरू होते ही पूरे मार्ग में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

अधिकारियों के अनुसार, तीर्थयात्रियों का पहला जत्था दो प्रमुख बेस कैंपों से रवाना हुआ। इनमें अनंतनाग जिले के नुनवान-पहलगाम और मध्य कश्मीर के गंदेरबल जिले के बालटाल क्षेत्र शामिल हैं। इन दोनों मार्गों को अमरनाथ यात्रा के प्रमुख रूट माना जाता है, जिनके जरिए श्रद्धालु पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं।

इस वर्ष यात्रा पारंपरिक दो मार्गों से संचालित की जा रही है। पहला मार्ग नुनवान-पहलगाम रूट है, जिसकी दूरी लगभग 48 किलोमीटर है। यह मार्ग अपेक्षाकृत लंबा लेकिन अधिक पारंपरिक माना जाता है। दूसरा मार्ग बालटाल-पलदल रूट है, जो लगभग 14 किलोमीटर लंबा है और इसे अपेक्षाकृत छोटा लेकिन कठिन मार्ग माना जाता है।

रुक-रुक कर हो रही बारिश के बावजूद यात्रा की शुरुआत समय पर की गई। प्रशासन ने बताया कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। यात्रा सुबह-सुबह दोनों मार्गों से शुरू हुई, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया।

यात्रा में पुरुषों, महिलाओं और साधुओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए हैं। धार्मिक आस्था से जुड़े इस वार्षिक आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग भाग लेते हैं। यात्रा शुरू होते ही दोनों बेस कैंपों पर “बम बम भोले” के जयकारे गूंज उठे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों, जिनमें संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक शामिल हैं, ने बेस कैंपों पर ध्वजारोहण कर यात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया। इसके बाद तीर्थयात्रियों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।

इससे पहले गुरुवार को जम्मू के भगवती नगर स्थित यात्री बेस कैंप से लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस पहले जत्थे में 4,809 से अधिक तीर्थयात्री शामिल थे, जो सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर की ओर रवाना हुए।

प्रशासन की ओर से यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे मार्ग पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं, राहत शिविरों और आपातकालीन सेवाओं को भी सक्रिय रखा गया है ताकि किसी भी परिस्थिति में श्रद्धालुओं को सहायता मिल सके।

यात्रा के दौरान मौसम एक महत्वपूर्ण चुनौती रहता है, क्योंकि उच्च हिमालयी क्षेत्र में अचानक मौसम परिवर्तन सामान्य बात है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को सावधानी बरतने और निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

हर साल लाखों श्रद्धालु अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए इस यात्रा में शामिल होते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अनुशासन और व्यवस्था का भी उदाहरण मानी जाती है।

इस वर्ष की यात्रा को लेकर प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं। दोनों मार्गों पर आधारभूत सुविधाओं, चिकित्सा सहायता केंद्रों और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन टीमों को भी तैनात किया गया है।

अमरनाथ यात्रा की शुरुआत के साथ ही कश्मीर घाटी में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का माहौल भी तेज हो गया है। श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा अवधि के दौरान सभी व्यवस्थाओं को लगातार निगरानी में रखने का निर्णय लिया है।

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