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Amarnath Yatra 2026: प्रशासन ने दी रजिस्टर्ड तारीख पर यात्रा की सलाह

Jammu जम्मू: जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को सख्त सलाह दी है कि वे केवल अपनी रजिस्टर्ड (पंजीकृत) तारीख पर ही यात्रा करें। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित स्लॉट के अनुसार यात्रा करने से भीड़ प्रबंधन आसान होगा और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। यह सलाह इस वर्ष की यात्रा के सुचारू संचालन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है।
दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक प्राकृतिक गुफा मंदिर है, जहां हर वर्ष बर्फ से स्वयं बनने वाला शिवलिंग श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए कठिन यात्रा करते हैं।
यह पवित्र तीर्थयात्रा दो प्रमुख मार्गों से की जाती है। पहला पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जो अनंतनाग जिले में स्थित है और लगभग 48 किलोमीटर लंबा है। यह मार्ग अपेक्षाकृत लंबा होने के बावजूद अधिक पारंपरिक माना जाता है। दूसरा मार्ग बालटाल-पलदल मार्ग है, जो गंदेरबल जिले में स्थित है और लगभग 14 किलोमीटर लंबा है। यह मार्ग छोटा लेकिन खड़ी चढ़ाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा शुक्रवार (3 जुलाई) को शुरू हो चुकी है। यात्रा की शुरुआत के साथ ही पहले जत्थे ने दोनों प्रमुख बेस कैंपों—नुनवान-पहलगाम और बालटाल-पलदल—से अपनी यात्रा आरंभ की। प्रशासन ने दोनों मार्गों पर यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाने की व्यवस्था की है।
अधिकारियों के अनुसार, इस बार यात्रा 57 दिनों तक चलेगी और 28 अगस्त तक जारी रहेगी। इतने लंबे समय तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहेगी, जिसके लिए प्रशासन ने विस्तृत प्रबंधन योजना तैयार की है।
यात्रा के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। दोनों मार्गों पर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और अन्य अर्धसैनिक बलों के हजारों जवानों को तैनात किया गया है। सुरक्षा बल पूरे मार्ग पर निगरानी, चेकिंग और एस्कॉर्ट व्यवस्था संभाल रहे हैं।
इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। यात्रा मार्गों पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं, जहां से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यात्रा का संचालन किया जा रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण यहां अचानक मौसम बदलने की संभावना रहती है, इसलिए श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सा सुविधा, राहत शिविर और आपातकालीन सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। दोनों मार्गों पर नियमित अंतराल पर चिकित्सा कैंप लगाए गए हैं ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तुरंत सहायता दी जा सके।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यात्रा केवल पंजीकृत यात्रियों के लिए ही मान्य होगी। बिना पंजीकरण या निर्धारित तारीख से अलग यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे यात्रा व्यवस्था को नियंत्रित और सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
हर वर्ष की तरह इस बार भी अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। लाखों लोग इस पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सामूहिक अनुशासन और व्यवस्था का उदाहरण भी मानी जाती है।
कुल मिलाकर, 57 दिनों तक चलने वाली इस अमरनाथ यात्रा के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था लागू की है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुचारू रूप से अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।





