जम्मू और कश्मीर

36 साल के निर्वासन पर चर्चा, जम्मू में AGT का सेमिनार आयोजित

Ratna Netam
6 April 2026 5:39 PM IST
36 साल के निर्वासन पर चर्चा, जम्मू में AGT का सेमिनार आयोजित
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JAMMU.जम्मू: AGT द्वारा 36 साल के निर्वासन और आगे की राह विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और विस्थापन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य पिछले 36 वर्षों से चल रहे निर्वासन के प्रभावों को समझना और भविष्य के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था। वक्ताओं ने बताया कि लंबे समय से विस्थापित समुदाय को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें अब गंभीरता से हल करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए और कहा कि निर्वासन ने लोगों के जीवन पर गहरा असर डाला है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, आवास और पहचान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। वक्ताओं ने सरकार से अपील की कि विस्थापित परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
सेमिनार में यह भी जोर दिया गया कि विस्थापन के मुद्दे का समाधान केवल राहत देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक नीतियों और योजनाओं की आवश्यकता है। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि प्रभावित लोगों को स्थिर और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को इस मुद्दे से जोड़ना और उन्हें समाधान प्रक्रिया का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है।
AGT के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह के सेमिनार का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान और नीतिगत बदलाव की दिशा में कदम उठाना है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की योजना की जानकारी दी।
सेमिनार के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि निर्वासन के 36 साल बाद अब समय आ गया है कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर स्थायी समाधान और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
कुल मिलाकर, जम्मू में आयोजित एजीटी का यह सेमिनार विस्थापन के मुद्दे को फिर से केंद्र में लाने और आगे की राह तय करने का महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस दिशा में ठोस पहल देखने को मिलेगी।
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