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बारामूला। उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले की उड़ी तहसील में निर्माणाधीन एनएचपीसी उड़ी-1 स्टेज-2 जलविद्युत परियोजना की टनल में एक बार फिर हादसा हुआ है। टनल के भीतर काम करने के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए एक मजदूर ने बुधवार को श्रीनगर स्थित एसकेआइएमएस सौरा में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मजदूर की मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में शोक के साथ-साथ लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।
मृतक की पहचान जावेद अहमद बाटला उर्फ जावेद खान, निवासी प्रिंगल बोनियार के रूप में हुई है। जावेद निर्माणाधीन परियोजना की टनल साइट पर एक्स इन्फ्रा कंपनी के लिए मजदूरी का काम कर रहा था। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
टनल में काम के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार जावेद उड़ी-1 स्टेज-2 जलविद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन टनल में काम कर रहा था। इसी दौरान वह हादसे की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और सहकर्मियों में हड़कंप मच गया। घायल मजदूर को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
गंभीर हालत को देखते हुए उसे आगे के उपचार के लिए श्रीनगर स्थित एसकेआइएमएस सौरा ले जाया गया। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा था। कई प्रयासों के बावजूद बुधवार को उसकी हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।
जावेद की मौत की खबर उसके परिवार और गांव तक पहुंचते ही मातम छा गया। परिवार के लिए यह घटना बेहद पीड़ादायक है। एक मजदूर के रूप में अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले जावेद की मौत से परिजनों को गहरा सदमा लगा है।
इलाके में गम और गुस्से का माहौल
हादसे के बाद प्रिंगल बोनियार और आसपास के इलाकों में गम और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों ने निर्माणाधीन टनल में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि भारी और जोखिम वाले निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
जावेद की मौत ने परियोजना में काम करने वाले अन्य मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि टनल में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण तथा सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।
निर्माण कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल
घटना के बाद निर्माण कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और मजदूरों से जुड़े लोगों का कहना है कि टनल जैसे संवेदनशील निर्माण स्थल पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना जरूरी है। यहां थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
हादसे की परिस्थितियों और इसकी वास्तविक वजह की विस्तृत जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि हादसा किस कारण हुआ, उस समय टनल के अंदर कौन सा काम चल रहा था और क्या मजदूरों के लिए निर्धारित सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया गया था या नहीं तथा दुर्घटना की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं।
परियोजना में मजदूरों की सुरक्षा अहम मुद्दा
जलविद्युत परियोजनाओं की टनल में निर्माण कार्य अत्यधिक जोखिम वाला होता है। जमीन के भीतर काम करने के दौरान चट्टानों के खिसकने, निर्माण सामग्री गिरने, मशीनरी से दुर्घटना और अन्य तकनीकी जोखिमों की आशंका बनी रहती है। इसलिए ऐसे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी होता है।
जावेद की मौत ने इसी मुद्दे को फिर सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना के निर्माण कार्य की गति के साथ मजदूरों की सुरक्षा पर भी बराबर ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि किसी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में कमी है तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।
परिवार के सामने आर्थिक संकट की चिंता
जावेद अहमद बाटला उर्फ जावेद खान की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मजदूरी करके परिवार का सहारा बने जावेद की अचानक मौत के बाद परिजनों के सामने भावनात्मक संकट के साथ आर्थिक परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं।





