जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर हाईवे पर 73 खतरनाक ब्लैक कॉरिडोर

Saba Naaz
31 July 2026 2:36 PM IST
जम्मू-कश्मीर हाईवे पर 73 खतरनाक ब्लैक कॉरिडोर
x

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों के लिहाज से बेहद संवेदनशील 73 ब्लैक कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं। वहीं केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भी एक ऐसा खतरनाक क्षेत्र पहचाना गया है, जहां दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। इन स्थानों की पहचान पिछले वर्षों में हुए सड़क हादसों के आंकड़ों के आधार पर की गई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि वर्ष 2023 से 2025 तक के सड़क दुर्घटना रिकॉर्ड के आधार पर इन ब्लैक कॉरिडोर की पहचान की गई है। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल का इस्तेमाल किया गया। यह प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ई-डीएआर) के आंकड़ों के आधार पर पूरी की गई है।

मंत्रालय के अनुसार, देशभर में कुल 6,358 ब्लैक कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के 73 क्षेत्र शामिल हैं, जो देश के कुल ब्लैक कॉरिडोर का करीब 1.15 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं लद्दाख में एक ब्लैक कॉरिडोर की पहचान हुई है। सरकार का कहना है कि इन सभी खतरनाक हिस्सों को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

ब्लैक कॉरिडोर उन सड़क हिस्सों को कहा जाता है, जहां लगातार दुर्घटनाएं होती हैं और जिनमें लोगों की मौत या गंभीर चोटों के मामले सामने आते हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़क की स्थिति, मोड़, यातायात दबाव, तेज रफ्तार और अन्य कारणों से हादसों का खतरा बढ़ जाता है।

देश में सबसे ज्यादा ब्लैक कॉरिडोर तमिलनाडु में पाए गए हैं, जहां 958 ऐसे क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 671, कर्नाटक में 607, महाराष्ट्र में 477, केरल में 386 और आंध्र प्रदेश में 384 ब्लैक कॉरिडोर हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर की तुलना में हिमाचल प्रदेश में 11, पंजाब में 31 और उत्तराखंड में 49 ब्लैक कॉरिडोर दर्ज किए गए हैं।

सरकार ने बताया कि ब्लैक कॉरिडोर को सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जाता है। तत्काल उपायों के तहत सड़क पर बेहतर मार्किंग, चेतावनी संकेतक बोर्ड, क्रैश बैरियर, रोड स्टड, डेलीनेटर लगाने, अवैध डिवाइडर कट बंद करने और हाईवे लाइटिंग जैसे कदम उठाए जाते हैं। इसके अलावा ट्रैफिक नियंत्रण के लिए भी आवश्यक व्यवस्था की जाती है।

वहीं लंबे समय के सुधार कार्यों में सड़क की बनावट में बदलाव, खतरनाक मोड़ों को ठीक करना, जंक्शन सुधार, सड़क चौड़ीकरण, अंडरपास और ओवरपास निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। हालांकि इन परियोजनाओं को पूरा करने में कई बार जमीन अधिग्रहण, वन विभाग की मंजूरी और बिजली-पानी जैसी सेवाओं को स्थानांतरित करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ब्लैक कॉरिडोर सुधार के लिए अलग से कोई विशेष बजट निर्धारित नहीं किया जाता। इन क्षेत्रों में किए जाने वाले सुधार कार्य या तो चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का हिस्सा होते हैं या फिर जरूरत के अनुसार अलग परियोजनाओं के माध्यम से पूरे किए जाते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वर्ष 2021-22 में 6,817 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जबकि 2022-23 में 7,370 करोड़ रुपये, 2023-24 में 10,528 करोड़ रुपये, 2024-25 में 10,331 करोड़ रुपये और 2025-26 में 8,083 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 में 30 जून तक जम्मू-कश्मीर के राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 1,846 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 1,484 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। वहीं लद्दाख के लिए इस अवधि में 70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

सरकार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 73 और लद्दाख के एक ब्लैक कॉरिडोर के लिए अलग-अलग परियोजना विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। हालांकि, इन क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित बनाने की योजना है। स्थानीय जरूरत और स्थिति के अनुसार छोटे और बड़े सुधार कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में शामिल किए जाएंगे।

सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार का कहना है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान और सुधार लगातार जारी प्रक्रिया है। ब्लैक कॉरिडोर में किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और सड़क हादसों में कमी लाना है। आने वाले समय में इन खतरनाक हिस्सों पर विशेष निगरानी और सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।

Next Story