जम्मू और कश्मीर

फ्लाईओवर निर्माण के लिए 39 दुकानें ध्वस्त पुनर्वास से पहले उजड़ी रोजी-रोटी

Kavita2
11 Sept 2026 2:17 PM IST
फ्लाईओवर निर्माण के लिए 39 दुकानें ध्वस्त पुनर्वास से पहले उजड़ी रोजी-रोटी
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जम्मू। कुंजवानी-गांधी नगर फ्लाईओवर के निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए सतवारी चौक और नई बस्ती में वर्षों से संचालित दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई से कुल 39 दुकानदारों का रोजगार प्रभावित हुआ है। दुकानदारों के पुनर्वास को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और उनके लिए गोल गुजराल के गोल क्षेत्र में वंडरलैंड पार्क के पास जमीन भी चिह्नित की गई है। इसके बावजूद वैकल्पिक स्थान पर दुकानें बनने से पहले पुराने प्रतिष्ठान तोड़े जाने से कारोबारियों में नाराजगी है।

दुकानदारों का कहना है कि वे फ्लाईओवर निर्माण या विकास परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी थी कि प्रशासन पहले नई जगह पर दुकानें तैयार कर उन्हें बसाता और उसके बाद पुरानी दुकानों को हटाता। नई जगह पर रोजगार शुरू होने की व्यवस्था किए बिना दुकानें तोड़ दिए जाने से उनके सामने परिवार का खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया है।

कुंजवानी-गांधी नगर फ्लाईओवर परियोजना के लिए सतवारी चौक और नई बस्ती की कुछ दुकानों को हटाया जाना प्रस्तावित था। इन दुकानों के कारण निर्माण क्षेत्र में आवश्यक जगह उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से दुकानदारों को पहले ही प्रतिष्ठान खाली करने की सूचना दी गई थी। बुधवार को बिजली कनेक्शन काटने के साथ दुकानें खाली करने के निर्देश भी दे दिए गए थे।

निर्देश मिलने के बाद अधिकांश दुकानदारों ने अपना सामान बाहर निकाल लिया था। सतवारी चौक में ध्वस्त की गई अधिकतर दुकानें कार्रवाई से पहले खाली हो चुकी थीं। इसके बावजूद बुलडोजर चलने के दौरान व्यापारियों और उनके परिवारों में मायूसी दिखाई दी। कई दुकानदारों ने इन प्रतिष्ठानों में वर्षों तक काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण किया था।

दुकानदारों ने अपने पुनर्वास की मांग को लेकर करीब दो वर्ष तक संघर्ष किया। लंबी बातचीत और प्रयासों के बाद सरकार ने पुनर्वास को मंजूरी दी। इसके लिए गोल गुजराल के गोल क्षेत्र में वंडरलैंड पार्क के पास भूमि चिह्नित की गई। प्रस्तावित स्थान को लेकर भी दुकानदार लगभग सहमत हो गए थे। अब उन्हें केवल वहां दुकानों का निर्माण पूरा होने और आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार था।

व्यापारियों को उम्मीद थी कि नई दुकानें तैयार होने के बाद वे अपना सामान वहां स्थानांतरित कर कारोबार जारी रख सकेंगे। इससे पुरानी जगह से हटने और नई जगह रोजगार शुरू करने के बीच कोई लंबा अंतर नहीं रहता। लेकिन वैकल्पिक दुकानें तैयार होने से पहले ही पुराने प्रतिष्ठान ध्वस्त कर दिए गए। इसके कारण सभी 39 कारोबारियों का काम तत्काल बंद हो गया है।

प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि दुकानें केवल एक भवन या ढांचा नहीं थीं, बल्कि उनके परिवारों की आय का मुख्य साधन थीं। दुकान बंद होने से मालिकों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों, सामान पहुंचाने वाले आपूर्तिकर्ताओं और अन्य संबंधित लोगों की आय पर भी असर पड़ सकता है। नई जगह दुकान मिलने तक उनके पास नियमित कमाई का कोई निश्चित साधन नहीं है।

दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि पुनर्वास की प्रक्रिया को अब प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। चिह्नित जमीन पर दुकानें बनाकर शीघ्र आवंटित की जाएं, ताकि वे अपना कारोबार दोबारा शुरू कर सकें। व्यापारियों का कहना है कि परियोजना की गति के साथ उनके पुनर्वास का काम भी उसी तेजी से आगे बढ़ना चाहिए था।

फ्लाईओवर जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कई बार सड़क किनारे बने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, मकानों और दूसरी संरचनाओं को हटाना पड़ता है। ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य यातायात व्यवस्था में सुधार और निर्माण एजेंसी को पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना होता है। लेकिन इससे प्रभावित लोगों के लिए समय पर पुनर्वास की व्यवस्था करना भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

सतवारी चौक व्यस्त यातायात और व्यावसायिक गतिविधियों वाला क्षेत्र है। यहां छोटी-बड़ी दुकानों पर बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका निर्भर रही है। फ्लाईओवर बनने से भविष्य में यातायात जाम से राहत मिलने और वाहनों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है, लेकिन मौजूदा कार्रवाई से प्रभावित परिवारों के सामने तत्काल आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

दुकानदारों के अनुसार, प्रशासन को वैकल्पिक स्थल पर बिजली, पानी, सड़क, पार्किंग और ग्राहकों की पहुंच जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। केवल जमीन चिह्नित कर देना पर्याप्त नहीं होगा। नए बाजार को इस तरह विकसित करने की आवश्यकता है कि वहां व्यापार चल सके और ग्राहकों के आने-जाने में परेशानी न हो।

वंडरलैंड पार्क के निकट चिह्नित जमीन पर दुकानें कब तक तैयार होंगी, इस बारे में स्पष्ट समय-सारणी की मांग की जा रही है। प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि उन्हें निर्माण और आवंटन की प्रगति के बारे में नियमित जानकारी मिलनी चाहिए। यदि इस काम में अधिक समय लगता है तो अंतरिम अवधि के लिए अस्थायी दुकान या आर्थिक सहायता का विकल्प भी देखा जाना चाहिए।

प्रशासन ने कार्रवाई से पहले बिजली कनेक्शन काटकर दुकानों को खाली करने का निर्देश दिया था। इसके कारण बड़ी संख्या में व्यापारी अपना सामान सुरक्षित निकालने में सफल रहे। इससे ध्वस्तीकरण के दौरान सामान के नुकसान की आशंका कुछ हद तक कम हुई। इसके बावजूद दुकानें खत्म होने से उनका कारोबार पूरी तरह रुक गया।

व्यापारियों का कहना है कि उन्हें दोबारा काम शुरू करने में कई तरह के खर्च उठाने पड़ेंगे। सामान को अस्थायी स्थान पर रखने, नई दुकान में व्यवस्था बनाने और ग्राहकों से दोबारा संपर्क स्थापित करने में समय तथा पैसा लगेगा। यदि पुनर्वास में देरी हुई तो उनकी बचत भी खत्म हो सकती है।

फ्लाईओवर परियोजना पूरी होने के बाद इस क्षेत्र में यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है। कुंजवानी और गांधी नगर के बीच आवागमन सुगम बनाने वाली यह परियोजना लंबे समय की जरूरत को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए प्रशासन ने अतिक्रमण और निर्धारित निर्माण क्षेत्र में बनी संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई की है।

हालांकि, विकास कार्यों के दौरान प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। पुनर्वास की मंजूरी से यह स्पष्ट है कि सरकार ने दुकानदारों की मांग को स्वीकार किया है। अब सवाल इसके समयबद्ध क्रियान्वयन का है। पुरानी दुकानें टूटने के बाद नई दुकानें तैयार करने में देरी व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।

प्रभावित कारोबारियों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी स्थिति को समझते हुए गोल गुजराल क्षेत्र में निर्माण जल्द शुरू कराएगा। वे चाहते हैं कि दुकान आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी हो और सभी 39 पात्र दुकानदारों को तय व्यवस्था के अनुसार स्थान मिले। फिलहाल पुरानी दुकानों के मलबे के साथ इन परिवारों का नियमित रोजगार भी खत्म हो गया है और सभी की नजर अब पुनर्वास योजना पर टिकी है।

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