हिमाचल प्रदेश

Himachal में चुनावी आचार संहिता के चलते नूरपुर स्कूल का काम रुका

Ratna Netam
23 April 2026 4:38 PM IST
Himachal में चुनावी आचार संहिता के चलते नूरपुर स्कूल का काम रुका
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने के साथ ही नूरपुर बॉयज स्कूल की भविष्यवाणी अनिश्चित हो गई है। स्कूल के निर्माण और नवीनीकरण से जुड़े कई कार्य चुनाव अवधि के दौरान रोक दिए गए हैं, जिससे छात्र और शिक्षक दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों पर रोक लग जाती है ताकि चुनाव में किसी भी प्रकार की अनियमितता या राजनीतिक लाभ का आरोप न लग सके। इसी कारण नूरपुर बॉयज स्कूल की परियोजनाओं पर काम रोक दिया गया है।
स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक बताते हैं कि लंबे समय से चल रही मरम्मत और विस्तार के काम अब अधर में हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए सुविधाओं की कमी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा उनकी पढ़ाई और रोज़मर्रा की गतिविधियों पर असर डाल रहा है।
स्थानीय लोगों ने भी चिंता जताई है कि स्कूल का काम रुके रहने से बच्चों के शिक्षा स्तर और जीवन गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि चुनाव आचार संहिता के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण शैक्षिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।
वहीं, प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आचार संहिता नियमों के तहत किसी भी नई परियोजना या धन का वितरण चुनाव प्रक्रिया के दौरान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव समाप्त होने के बाद स्कूल निर्माण और मरम्मत के कार्य फिर से शुरू किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, लेकिन इसका प्रभाव सामाजिक और शैक्षिक परियोजनाओं पर पड़ता है। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार और प्रशासन पूर्व योजना बनाकर ऐसी परियोजनाओं को समय पर पूरा करें।
इस दौरान, छात्रों और अभिभावकों ने कहा कि स्कूल में मूलभूत सुविधाओं जैसे नए क्लासरूम, विज्ञान लैब और खेल परिसर की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशासन से आश्वासन मांगा कि चुनाव खत्म होते ही कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाएगा।
अंततः, नूरपुर बॉयज स्कूल की स्थिति इस बात की याद दिलाती है कि चुनावी आचार संहिता के दौरान सरकारी परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो सकती है। प्रशासन, शिक्षक और स्थानीय समुदाय मिलकर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि बच्चों की पढ़ाई और सुविधा पर लंबे समय तक असर न पड़े।
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