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शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर्स के लिए एक समान नीति बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान इसकी घोषणा की।
मुख्यमंत्री विधायक आरएस बाली के सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग विभागों और संस्थानों में काम कर रहे मल्टी टास्क वर्कर्स की सेवा शर्तों और मानदेय में अंतर है। सरकार अब इस व्यवस्था को एकरूप बनाने की दिशा में काम कर रही है।
अलग-अलग विभागों में अलग व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि अभी निगमों, बोर्डों और विभिन्न विभागों में तैनात मल्टी टास्क वर्कर्स से अलग-अलग तरीके से काम लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारियों से प्रतिदिन चार घंटे काम लिया जाता है, जबकि कुछ से छह घंटे तक काम लिया जा रहा है। इसके अलावा उनकी सेवा शर्तें भी अलग-अलग हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग नियम होने के कारण मल्टी टास्क वर्कर्स को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मानदेय में आएगी समानता
सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार मल्टी टास्क वर्कर्स के लिए एक समान नीति तैयार करने पर गंभीरता से काम कर रही है।
नई नीति लागू होने के बाद कर्मचारियों के मानदेय में एकरूपता आएगी और उन्हें बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी मल्टी टास्क वर्कर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए एक व्यवस्थित नीति तैयार करना है।
कर्मचारियों की लंबे समय से मांग
मल्टी टास्क वर्कर्स लंबे समय से सेवा शर्तों में सुधार और समान मानदेय की मांग करते रहे हैं।
उनका कहना है कि एक ही तरह का काम करने के बावजूद अलग-अलग विभागों में उन्हें अलग-अलग मानदेय और सुविधाएं मिलती हैं।
ऐसे में समान नीति बनने से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार कर रही नीति पर काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस विषय को लेकर गंभीर है और जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि नीति तैयार करते समय सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों और विभागों दोनों के हितों का संतुलन बना रहे।
विभागों में बेहतर व्यवस्था की उम्मीद
नई नीति लागू होने से मल्टी टास्क वर्कर्स की कार्यप्रणाली में भी सुधार आने की संभावना है।
एक समान नियम होने से कर्मचारियों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
साथ ही विभागों में कर्मचारियों के प्रबंधन में भी आसानी होगी।
विधानसभा में उठा कर्मचारियों का मुद्दा
मल्टी टास्क वर्कर्स से जुड़ा यह मुद्दा विधायक आरएस बाली ने विधानसभा में उठाया था।
जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने सरकार की आगामी योजना की जानकारी दी और कहा कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीति बनाई जाएगी।
हजारों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत
हिमाचल प्रदेश के कई सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में बड़ी संख्या में मल्टी टास्क वर्कर्स कार्यरत हैं।
इन कर्मचारियों को नई नीति का लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार की इस पहल को कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नीति बनने के बाद दूर होंगी विसंगतियां
वर्तमान व्यवस्था में काम के घंटे, मानदेय और सेवा शर्तों में अंतर के कारण कई विसंगतियां बनी हुई हैं।
सरकार की ओर से तैयार की जाने वाली नई नीति से इन असमानताओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के इस ऐलान के बाद मल्टी टास्क वर्कर्स में उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनके लिए एक बेहतर और समान व्यवस्था लागू हो सकेगी।





