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किन्नौर। छह साल के लंबे अंतराल के बाद शिपकी ला दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के व्यापारियों ने आयातित सामान पर लगाए जा रहे इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) के विरोध में इस व्यापार का बहिष्कार करने का फैसला किया है।
किन्नौर भारत-चीन व्यापार संघ ने बुधवार को आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक केंद्र सरकार सीमा व्यापार के लिए IGST से छूट नहीं देती, तब तक कोई भी पंजीकृत व्यापारी शिपकी ला दर्रे के माध्यम से चीन के साथ व्यापारिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेगा।
व्यापारियों के इस फैसले से शिपकी ला के रास्ते शुरू होने जा रहे सीमा व्यापार की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने पहले ही इस व्यापार को कस्टम ड्यूटी से छूट दे रखी है, लेकिन IGST लागू होने से छोटे व्यापारियों के लिए कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा।
छह साल बाद फिर खुलने जा रहा था व्यापार मार्ग
शिपकी ला दर्रा भारत और चीन के बीच सदियों पुराने व्यापारिक संबंधों का प्रतीक रहा है। किन्नौर क्षेत्र के व्यापारी लंबे समय से इस मार्ग के जरिए चीन के साथ पारंपरिक व्यापार करते रहे हैं। हालांकि, वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा पर तनाव और कोविड-19 महामारी के कारण यह व्यापार बंद हो गया था।
करीब छह साल के अंतराल के बाद इस ऐतिहासिक व्यापार मार्ग को फिर से सक्रिय करने की तैयारी की जा रही थी। सरकार की ओर से शिपकी ला के रास्ते व्यापार शुरू करने की दिशा में कदम उठाए गए थे, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद थी।
लेकिन अब व्यापारियों के विरोध के कारण इस प्रक्रिया में नई अड़चन पैदा हो गई है।
IGST को लेकर व्यापारियों में नाराजगी
किन्नौर के व्यापारियों का कहना है कि सीमा व्यापार पर IGST लागू करना उनके हितों के खिलाफ है। उनका तर्क है कि यह व्यापार सामान्य आयात-निर्यात की तरह नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच लंबे समय से चली आ रही पारंपरिक व्यवस्था का हिस्सा है।
व्यापारियों का कहना है कि कस्टम ड्यूटी में छूट दिए जाने के बावजूद यदि IGST लगाया जाता है तो इससे सामान की लागत बढ़ जाएगी। इससे छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा और सीमा व्यापार आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह जाएगा।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि जिस तरह कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है, उसी तरह IGST से भी पूरी छूट दी जाए।
व्यापार संघ ने लिया सामूहिक निर्णय
किन्नौर भारत-चीन व्यापार संघ की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में व्यापारियों ने एकजुट होकर फैसला लिया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे शिपकी ला के जरिए चीन के साथ व्यापार नहीं करेंगे।
संघ के सदस्यों का कहना है कि यह निर्णय किसी विरोध की भावना से नहीं, बल्कि व्यापार को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। उनका कहना है कि सरकार को सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों की समस्याओं को समझना चाहिए और उचित समाधान निकालना चाहिए।
सीमावर्ती अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
शिपकी ला व्यापार मार्ग केवल व्यापारिक गतिविधियों का माध्यम नहीं है, बल्कि किन्नौर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। सीमावर्ती इलाकों के कई परिवार पारंपरिक रूप से इस व्यापार पर निर्भर रहे हैं।
व्यापार शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलने की उम्मीद थी। लेकिन व्यापारियों के बहिष्कार के फैसले से इन संभावनाओं पर फिलहाल अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा व्यापार दोबारा शुरू होना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।
सरकार से बातचीत की उम्मीद
व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करेगी और उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी। उनका कहना है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक IGST को लेकर स्पष्ट राहत नहीं मिलती, तब तक व्यापार में भाग लेना संभव नहीं होगा।
व्यापार संघ का मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर केवल व्यापारियों पर ही नहीं, बल्कि पूरे सीमावर्ती क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा।
ऐतिहासिक व्यापार को फिर गति देने की चुनौती
भारत और चीन के बीच शिपकी ला मार्ग से व्यापार शुरू करना रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना थी।
हालांकि, व्यापारियों की मौजूदा आपत्ति ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार के रुख पर है कि वह IGST को लेकर क्या फैसला लेती है।
कुल मिलाकर, छह साल बाद शुरू होने जा रहे भारत-चीन सीमा व्यापार पर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। किन्नौर के व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि IGST से छूट मिलने तक वे इस व्यापार में हिस्सा नहीं लेंगे। ऐसे में ऐतिहासिक शिपकी ला व्यापार मार्ग को दोबारा सक्रिय करने की कोशिशों के सामने नई बाधा खड़ी हो गई है।





